Covid-19 महामारी के दौरान मणिपुर राज्य में LGBTQI समुदाय के सहयोग के लिए " खुडोल पहल " चलाया जा रहा है। जिसकी तारीफ यूनाइटेड नेशंस की एजेंसी ने भी करी है । लगभग दो सप्ताह पहले सयुक्त राष्ट्र महसचिव के दूत ने युवाओ के लिए covid-19 के खिलाफ समावेश लड़ाई के शीर्ष 10 पहलो में मणिपुर राज्य में खूडोल पहल को भी सराहा है।खुडोल का मणिपुर की भाषा में इसका मतलब होता है "उपहार" होता है। 





संयुक्त राष्ट्र महाचिव का दुनिया के युवाओं के लिए एक राजदूत का ऑफिस न्यूयॉर्क में बनाया गया है। जिसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को सयुक्त राष्ट्र से जोड़ने है। युवाओं के अधिकार की बात करने वाले इस ऑफिस को 2013 में स्थापित किया गया था और श्रीलंका के जयथमा विक्रमनायके इस समय राजदूत के पद पर कार्यरत हैं। 


Ya_all NGO


मणिपुर में खुडोर पहल की शुरुआत, इंफाल के या_ऑल नाम के NGO के द्वारा किया गया है। या_ऑल  (Ya_all) NGO स्थापना 2017 में हुई थी इसके संस्थापक सदाम हंजबम है।  यह NGO मुख्य रूप से ट्रांसजेंडर कम्युनिटी के लिए काम करते हैं। अभी कोविड-19 के दौरान ज्यादातर राज्यो के सरकार का ध्यान ट्रांसजेंडर कम्युनिटी की जरूरतों पर नहीं गया। तो ऐसे में ट्रांसलेटर समुदाय की मदद के लिए ये या आल NGO ने बेड़ा उठाया। 


इस संस्था द्वारा LGBTQI समुदाय,  एचआईवी मरीजों, दैनिक वेतनभोगी श्रमिको, वयस्कों जो खुद का ध्यान नहीं रख सकते और बच्चों जो मां-बाप के साथ नहीं रहते उनके लिए भी भोजन, स्वास्थ और स्वच्छता इन तीनों का ध्यान रखा जाता है। लेकिन इनका मुख्य फोकस ट्रांसजेंडर समुदाय के ऊपर है।


 या_ऑल  (Ya_all) NGO ने जनता से पैसा इकट्ठा करके खोडल पहल की शुरुआत की जिसमे 100 वॉलिंटियर इस पहल से जुड़े हुए हैं जिन्होंने लगभग 2000 परिवारों और व्यक्तियों को 1000 से अधिक स्वास्थ्य किट ,1500 कंडोम, 6500 सैनिटरी पैड प्रदान किया है।


या_ऑल  संस्था और भी कार्यक्रमों को संचालित करता है इन्होंने मार्च महीने में देश की पहली ट्रांसजेंडर फुटबॉल क्लब शुरुआत की थी हालांकि यह न्यूज़ covid-19  के कारण कहीं पीछे चली गई थी। इंफाल स्थित या आल NGO मानसिक स्वास्थ्य  वर्कशॉप आयोजन के साथ साथ मिट्राम नाम के एक पहल शुरु किया है जो देश की पहली को-वर्किंग तथा नेटवर्किंग स्पेस है जिसका स्वामित्व और संचालन भारत में क्वीर इंडिविजुअल्स के द्वारा किया जाता हैं।



 

मणिपुर सरकार की पहल


मणिपुर सरकार ने भी LGBTQI समुदाय के लिए Covid-19 के दौरान खाश प्रावधान किया है। मणिपुर उन राज्यों में एक है जो covid-19 के दौरान अन्य राज्यो से आ रहे प्रवासियों के लिए बनाए गए क्वारंटाइन सेंटर्स में से ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों को अलग क्वारंटाइन सेंटर्स बनाया है जबकि ज्यादातर हिस्सों में ट्रांसजेंडर को पुरुषों के साथ रखा जा रहा है।


समावेशी सुरक्षित स्थान का मॉडल या ऑल NGO द्वारा बनाया गया था। इनके इस पहल नेतृत्व के बाद इंफाल के जिला प्रशासन ने चल रहे क्वारंटाइन सेंटर्स में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए अलग कमरे और अलग टॉयलेट की व्यवस्था किया और डिफरेंटली एबल्ड के लिए एक अलग रैप भी उपलब्ध कराया।ऐसे पहल के लिए मणिपुर सरकार की  तारीफ करी जानी जरूरी है।


क्वारंटाइन सेंटर्स में अलग रूम रखने के बाद 21 मई को मणिपुर सरकार ने ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए अलग से  डेडीकेटेड 2 क्वारंटाइन सेंटर्स बनाया। मणिपुर ऐसा करने वाला भारत पहला राज्य बना गए हैं। 


खुडोल जैसे पहल की उपयोगिता


भारत में 2 महीने से चल रहे लाकडॉउन के कारण ट्रांसजेंडर समुदाय पर भी काफी असर पड़ा है। इनके जीवनयापन के जो भी आमदनी का स्रोत है वह पूरी तरह से खत्म हो गया है। ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्य या तो घर-घर जाकर पैसा मांगते हैं या फिर किसी विशेष अवसर पर जाकर नाच गाना करते हैं।

ट्रांसजेंडर समुदाय कई सारे सदस्य सेक्स वर्क में भी लगे हैं। 


Covid-19 की वजह से ये सभी कम पूरी तरह से बंद हो गया है।इन सभी कारणों की वजह से ट्रांसजेंडर समुदाय पर भी असर पड़ा है। उनके खाने पीने और रहने की बहुत समस्या बड़ गई है।


 दूसरी बात ये भी है कि covid-19 के चलते मेडिकल सप्लाईज सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। ट्रांसजेंडर समुदाय के बहुत से सदस्य एचआईवी ऐड्स की से प्रभावित है और एंटी रेट्रो वायरल (ART) का ट्रीटमेंट सरकारी हॉस्पिटल में लेते हैं। लेकिन देश के अस्पताल इस वक्त कोविड-19 से लड़ने में व्यस्त है। इस वजह से ट्रांसजेंडर समुदाय ही नहीं बल्कि दूसरे भी जो एचआईवी पॉजिटिव लोग हैं वो अपना इलाज सही से नहीं करा पर रहे हैं। आज के समय में बहुत से इलाज सफर कर रहे है।


 आप को बता दें कि भारत में 0.26% के आसपास एचआईवी एड्स के मरीज है लेकिन ट्रांसजेंडर समुदाय में 3.1% है जो काफी ज्यादा है और इस समुदाय के बहुत से सदस्य एंटी रेट्रो वायरल की दवा हर समय लिया करते हैं।  


एक बात और भी है कि ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्य अपने जेंडर बदलने के लिए हार्मोन्स रिप्लेसमेंट थेरेपी लेते हैं ये भी covid-19 के चलते इस वक्त ये दवाई भी नहीं ले पा रहे हैं। 


Covid-19 के चलते बहुत से समस्याएं इस समुदाय के सामने उत्पन्न हो गई है ऐसे में खुडोल जैसे पहल की बहुत आश्यकता है।या आल NGO की पहल वास्तव में सराहने  योग्य है।


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