भारत और नेपाल के रिश्ते
भारत के BRO (BORDER ROAD ORGANISATION) द्वारा कैलाश मानसरोर यात्रा की सुविधा के लिए उत्तराखंड में लगभग 80 किलोमीटर लंबी पिथौरागढ़ से लिपुलेख दर्रे (चाइना बॉडर) तक सड़क मार्ग का निर्माण किया है। जिसका उद्घाटन हमारे रक्षा मंत्री माननीय श्री राजनाथ सिंह द्वारा 9 मई 2020 को video conferencing द्वारा किया गया। श्री राजनाथ सिंह का कहना है कि यह सड़क मार्ग भारतीय श्रद्धालु के कैलाश मनसरोर यात्रा को सुगम बनाये गा।भारत और नेेेपाल के रििश्तों बहुत पुराने और  सुदृढ़ हैं लेकिन सड़क निर्माण केे बाद नेपाल की तरफ से कुछ विरोध देखनेेे को मिली है।
नेपाल की आपत्ति -
इस सड़क मार्ग के निर्माण पर नेपाल ने आपत्ति जताई है नेपाल का कहना है कि यह सड़क मार्ग काली नदी के बिल्कुल पास से गुजर रहा है काली नदी का पूर्वी भाग और लिपुलेख दर्रे का दक्षिणी भाग नेपाल के अधिकार क्षेत्र का हिस्सा हैं। यहां सड़क बनाना उचित नहीं है। इस सड़क मार्ग के निर्माण के बाद नेपाल की राजधानी काठमांडू में भारत के विरोध मे नेपाली छात्रों और नेपाली कम्युनिस्ट के समर्थकों ने प्रदर्शन किया।


नेपाल के विदेश मंत्रालय द्वारा एक पत्र के माध्यम से भारत के प्रति अपना विरोध प्रस्तुत किया है। उनका कहना है कि भारत द्वारा 1816 के सिंगरौली संधि(आंग्ल -नेपाल संधि ) का भारत ने उल्लंघन किया है। इससे पहले भी जब भारत-चीन ने माई 2015 मैं लिपुलेख दर्रा से व्यापार करने के लिए संधि किया था उसमें भी नेपाल द्वारा विरोध प्रस्तुत किया गया। नेपाल के विदेश मंत्री मिस्टर प्रदीप कुमार ने द हिंदू के संवाददाता से बात करते हुए कहा कि भारत नेपाल सीमा पर सुरक्षा को देखते हुए नेपाल अपने बॉर्डर चौकियों को बढ़ाएंगे जो अभी लगभग 120 हैं।
आप को बता दे कि भारत और नेपाल के रिश्ते बहुत पुराने हैं लेकिन नेपाल में जब से कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार आई है उस समय से लगातार भारत के विरोध में बयान देखने को मिलता रहा है। नेपाल की  कम्युनिस्ट पार्टी का रुख एंटी इंडिया और प्रो चाइना रहा है। अभी हाल के दिनों में नेपाल के कम्युनिस्ट पार्टी में दरारें देखने को मिली थी लेकिन चाइना की कम्युनिस्ट पार्टी और चीन के राजदूत के द्वारा नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी में आई दरारों भरने का काम किया और नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी को बिखरना से बचा लिया।
भारत की प्रतिक्रिया-
हालांकि भारत ने नेपाल के इस विरोध को प्रभावी रूप से खारिज करते हुए भारत का कहना है कि कैलाश मानसरोवर यात्रा का यह नया मार्ग भारत की सीमा क्षेत्र में और भारत द्वारा कोई नया मार्ग नहीं बनाया गया है बल्कि पुराने सड़क मार्ग अच्छी प्रकार से विकसित किया है।इस पर नेपाल का विरोध बिल्कुल ही बेबुनियाद है। आपको बता दें किया नया मार्ग मानसरोवर यात्रियों के समय के साथ साथ खर्च भी कम करेगा। पहले जहां यात्रियों को यात्रा का लगभग 80% हिस्सा तिब्बत में करना होता था अब इस सड़क के निर्माण की वजह से केवल 20% ही तिब्बत में चलना होगा।
इन घटनाओं से भारत नेपाल रिश्ते में कुछ खटास देखने को मिल रहा हैं आशा करते है कि दोनों देश की सरकारे जल्द ही मिल कर इन छोटी छोटी समस्याओ का जल्द ही कोई हल ढूढ़ेगी ।

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