भारत के BRO (Border Roads Organisa) द्वारा मानसरोवर यात्रा को सुगम बनाने के लिए उत्तराखंड के पिथौरागढ़ को लिपुलेख दर्रे को सड़क मार्ग द्वारा जोड़ दिया गया है इसका उद्घाटन भारत के रक्षा मंत्री श्री नाथ राजनाथ सिंह ने वीडियो कांफ्रेंसिंग द्वारा 8 मई 2020 को किया गया।और कहा की यह मार्ग स्ट्रैटेजिक धार्मिक और व्यपार की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूण है यह मार्ग मानसरोवर यात्रा को एक सप्ताह में ही मोटर मार्ग द्वारा पूरी की जा सकेगी मार्ग निर्माण के बाद से ही नेपाल द्वारा आपत्तिजनक बयान आने शुरू हो गये।
नेपाल की सरकार का भारत के विरुद्ध बयानों का दौर यही तक नहीं रुका।20 मई 2020 नेपाल के प्रधानमंत्री KP Sharma oli ने इस covid-19 महामारी के दौर में भारत के लोगों के प्रति बहुत ही और असंवेदनशील बयान दिया है उनका कहना है कि भारत में जो कोरोना वायरस फैला है वो चाइना के वायरस और इटली के वायरस से ज्यादा खतरनाक है उन्होंने यह भी कहा की नेपाल की विपक्षी पार्टी भारत से लोगों को गैर क़ानूनी तरीके से नेपाल में ला रही है जिससे कोरोना वायरस फैला रहा है। आप को बता दे की 21 मई 2020 तक नेपाल covid -19 के 453 मामले सामने आये है और 3 लोगो की मृत्यु हुई है।
इस वैश्विक महामारी के दौर में बहुत सी जगहों पर चीन को लोगों के साथ भेदभाव देखने को मिल रहा है उस समय नेपाल के प्रधानमंत्री द्वारा अगर ऐसे बयान आते हैं तो भारत के लोगों के प्रति भी विश्व में भेदभाव देखने को मिल सकता है वाकई में ऐसे बयान भेदभाव पैदा कर सकते है। ऐसे बयान इस समय देखने को मिल रहा है जब नेपाल और भारत के बीच सीमा को लेकर अनबन हुई है।
ध्यान देने वाली बात यह भी है कि इस महामारी के समय में दक्षिण पूर्व एशिया का कोई भी देश किसी भी देश के विरुद्ध में इस महामारी को लेकर कोई भी आपत्तिजनक बयान नहीं दे रहा है बल्कि सभी देश इस वैश्विक महामारी से लड़ने के लिए एक दूसरे का साथ दे रही है। भारत भी अपने पड़ोसी देशों की मदद के लिए बहुत से सकारात्मक कदम उठाएं। बहुत से देशों को भारत ने दवाइयां, मेडिकल इक्विपमेंट एवं आवश्यक वस्तुएं जैसी सभी चीजों की आपूर्ति करा रहा है। यहां तक की भारत ने नेपाल की भी सहायता की है। और COVID-19 से लड़ने के लिए 23 टन Paracetamol और Hydroxychloroquine जैसी आवश्यक दवाइयां नेपाल को गिफ्ट किया है। बहुत से समाचार पत्रों में ये खबर प्रकाशित हुआ था।
इन सबके बाद भी अगर नेपाल की सरकार की तरफ से इस प्रकार के और असंवेदनशील और अपरिपक्व बयान आते हैं तो यह वाकई दुर्भाग्य पूर्ण हैै और भारत के लिए यह एक चिंता का विषय भी है। इस समय ऐसे बयानों की कड़ी आलोचना होनी चाहिए।
एक दूसरा फैक्टर यह भी है नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी के अच्छे संबंध चाइना के साथ है और भारत के साथ नहीं है। कुछ दिन पहले ही नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी में आपसी मतभेद हो गए थे और पार्टी दो खेमों में बट गई थी ऐसा लग रहा था कि केपी शर्मा ओली की सरकार गिर जाएगी। "THE KATHMANDU POST"के आर्टिकल के अनुसार नेपाल में चाइना की राजदूत द्वारा कम्युनिस्ट पार्टी के सभी सदस्यों से एक- एक करके बात की और उन्हें समझा कर कम्युनिस्ट पार्टी को गिरने से बचा लिया। आप समझ सकते हैं कि किस हद तक चाइना का नेपाल की आंतरिक राजनीति में दबदबा बढ़ गया है। तो जब तक नेपाल में कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार तब तक भारत विरोधी बयान और भारत विरोधी कदम आगे भी देखने को मिलते रहेंगे।
नेपाल ने जताई आपत्ति-
जब से इस इस सड़क मार्ग का भारत द्वारा उद्घाटन किया गया है।तब से नेपाल इसका विरोध कर रहा है। उद्घाटन के दिन से नेपाल के सड़कों भारत के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था। फिर नेपाल की सरकार ने इस सड़क निर्माण के खिलाफ भारत को एक पत्र लिख कर अपना विरोध जताया। नेपाल का कहना था कि 1816 के सिंगरौली संधि के मुताबिक कालापानी क्षेत्र और लिपुलेख दर्रा नेपाल के अधिकार क्षेत्र में आता है भारत इन क्षेत्रों पर किसी तरह का निर्माण कार्य नहीं कर सकता है। इस विरोध का भारत द्वारा खंडन करते हुए कहा गया कि भारत अपने अधिकारी क्षेत्र में निर्माण कार्य संपन्न किया है|और नेपाल का विरोध निराधार है । फिर कुछ ही दिन के बाद नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप ज्ञवाली भारतीय समाचार पत्र "The Hindu" के एक इंटरव्यू में कहा की नेपाल-भारत सीमा पर आने वाले समय में हम अपने सैन्य चौकियों को बढ़ाये गे जो अभी 120 के करीब है।नेपाल के द्वारा भारत विरुधि उठाये कदम-
19 मई 2020 को नेपाल की सरकार द्वारा अपने पार्लियामेंट में एक विशेष रेजोल्यूशन लाया गया जिसमें कालापानी क्षेत्र लिपुलेख दर्रा और लिम्पियाधूरा भारत से वापस लाने की बात करी गई और इस रेजोल्यूशन में नेपाल के मैं अधिकारिक मानचित्र लाने की बात कही गई। "THE KATHMANDU POST" के अनुसार नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने नेपाल की संसद में कहा गया कि काला पानी क्षेत्र, लिपुलेख और लिम्पियाधूरा हम भारत से वापस ले कर रहेंगे। नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप 18 मई 2020 को ट्वीट कर नेपाल के नए आधिकारिक मैप लाने की घोषणा की थी।![]() |
| Nepal new map |
भारत सरकार ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए नेपाल के इस ए मैप को गलत बताया है भारत का कहना है कि यह नक्शा किसी प्रकार के ऐतिहासिक तथ्यों से प्रमाणित नहीं है और भारत का यह भी कहा की हम सीमा विवाद द्वीविपक्षी संवाद के माध्यम से खत्म कर लेंगे। भारत किसी अप्रमाणित नक़्शे और आधारहिन् Territorial claims को स्वीकार नहीं करे गए और आशा करते है की नेपाल भारत की सम्प्रपुता का सम्मान करेगा भारत के उत्तराखंड राज्य के पिथौरागढ़ जिले में लिपुलेख दर्रा के पश्चिम में कालापानी क्षेत्र के समीप Tri- junction है जो भारत, नेपाल और चीन की सीमाओं को जोड़ता है। लगभग 335 Square km का यह क्षेत्र भारत और नेपाल के बीच बहुत सालों से विवादित है। वर्तमान में इस क्षेत्र में भारत का अधिकार है।
नेपाल की सरकार का भारत के विरुद्ध बयानों का दौर यही तक नहीं रुका।20 मई 2020 नेपाल के प्रधानमंत्री KP Sharma oli ने इस covid-19 महामारी के दौर में भारत के लोगों के प्रति बहुत ही और असंवेदनशील बयान दिया है उनका कहना है कि भारत में जो कोरोना वायरस फैला है वो चाइना के वायरस और इटली के वायरस से ज्यादा खतरनाक है उन्होंने यह भी कहा की नेपाल की विपक्षी पार्टी भारत से लोगों को गैर क़ानूनी तरीके से नेपाल में ला रही है जिससे कोरोना वायरस फैला रहा है। आप को बता दे की 21 मई 2020 तक नेपाल covid -19 के 453 मामले सामने आये है और 3 लोगो की मृत्यु हुई है।
इस वैश्विक महामारी के दौर में बहुत सी जगहों पर चीन को लोगों के साथ भेदभाव देखने को मिल रहा है उस समय नेपाल के प्रधानमंत्री द्वारा अगर ऐसे बयान आते हैं तो भारत के लोगों के प्रति भी विश्व में भेदभाव देखने को मिल सकता है वाकई में ऐसे बयान भेदभाव पैदा कर सकते है। ऐसे बयान इस समय देखने को मिल रहा है जब नेपाल और भारत के बीच सीमा को लेकर अनबन हुई है।
ध्यान देने वाली बात यह भी है कि इस महामारी के समय में दक्षिण पूर्व एशिया का कोई भी देश किसी भी देश के विरुद्ध में इस महामारी को लेकर कोई भी आपत्तिजनक बयान नहीं दे रहा है बल्कि सभी देश इस वैश्विक महामारी से लड़ने के लिए एक दूसरे का साथ दे रही है। भारत भी अपने पड़ोसी देशों की मदद के लिए बहुत से सकारात्मक कदम उठाएं। बहुत से देशों को भारत ने दवाइयां, मेडिकल इक्विपमेंट एवं आवश्यक वस्तुएं जैसी सभी चीजों की आपूर्ति करा रहा है। यहां तक की भारत ने नेपाल की भी सहायता की है। और COVID-19 से लड़ने के लिए 23 टन Paracetamol और Hydroxychloroquine जैसी आवश्यक दवाइयां नेपाल को गिफ्ट किया है। बहुत से समाचार पत्रों में ये खबर प्रकाशित हुआ था।
इन सबके बाद भी अगर नेपाल की सरकार की तरफ से इस प्रकार के और असंवेदनशील और अपरिपक्व बयान आते हैं तो यह वाकई दुर्भाग्य पूर्ण हैै और भारत के लिए यह एक चिंता का विषय भी है। इस समय ऐसे बयानों की कड़ी आलोचना होनी चाहिए।
नेपाल की सरकार क्यों दे रही है ऐसा बयान-
अभी नेपाल के कम्युनिस्ट पार्टी सरकार पर जनता और विपक्ष का बहुत दबाव है। नेपाल की सड़कों पर प्रदर्शन हो रहा है जिसको देखते हुए नेपाल की सरकार ऐसे भारत विरोधी बयान दे रही है और अपनी जनता को दिखाना चाहती है कि नेपाल की सरकार भारत के किसी कदम के सामने कमजोर नहीं।एक दूसरा फैक्टर यह भी है नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी के अच्छे संबंध चाइना के साथ है और भारत के साथ नहीं है। कुछ दिन पहले ही नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी में आपसी मतभेद हो गए थे और पार्टी दो खेमों में बट गई थी ऐसा लग रहा था कि केपी शर्मा ओली की सरकार गिर जाएगी। "THE KATHMANDU POST"के आर्टिकल के अनुसार नेपाल में चाइना की राजदूत द्वारा कम्युनिस्ट पार्टी के सभी सदस्यों से एक- एक करके बात की और उन्हें समझा कर कम्युनिस्ट पार्टी को गिरने से बचा लिया। आप समझ सकते हैं कि किस हद तक चाइना का नेपाल की आंतरिक राजनीति में दबदबा बढ़ गया है। तो जब तक नेपाल में कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार तब तक भारत विरोधी बयान और भारत विरोधी कदम आगे भी देखने को मिलते रहेंगे।
देखना है कि भारत सरकार इन सब घटनाओं पर क्या प्रतिक्रिया देती है। भारत के लिए ये आवश्य ही यह चिंता का विषय है लेकिन उम्मीद है की भारत बड़े ही डिप्लोमैटिक तरीके से इन समस्याओ का हल निकल लेगा ।






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