20 वीं सदी का सबसे बड़ा Y2K Software bug-

यह घटना उस समय की है जब 1999 ख़त्म होने वाला था और नई सदी 2000 की शुरुआत होने वाली थी। सारी दुनिया नए सदी की तैयरियां में लगी हुई थी नए सोच ,नए बदलाव के साथ 21 वीं शताब्दी की शुरुआत हो इसके लिए उत्साहित थे। वहीं दूसरी तरफ पूरे विश्व की सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री और इकोनोमिस्ट इस कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के सॉफ्टवेयर बग को लेकर चिंतित थे उन्हें डर था कि हम 31 दिसंबर 1999 की शाम के बाद हम कम्प्यूटर की घड़ी में 2000 में प्रवेश करेंगे या फिर 1900 में। 

Y2K Software bug  क्या है-


1960 के समय में सॉफ्टवेयर इंजीनियर कंप्यूटर प्रोग्रामिंग करना शुरू कर चुके थे। उस दशक में प्रोग्रामर्स पर इतना दबाव होता था कि कैसे कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के ख़र्च को कम किया जाए क्योंकि उस डाटा सुरक्षित करने के लिए पर किलोबाइट (KB) 100 डॉलर खर्च करने होते थे। और डाटा को सुरक्षित रखने के लिए बड़े-बड़े मशीनों की आवश्यकता होती थी। परंतु आज के जमाने में डाटा को सुरक्षित लिए बहुत कम खर्च करने होते हैं। और छोटे से हार्ड डिक में डाटा को GB या TB (terabyte) में आसानी से सुरक्षित कर सकते है।


खर्च को कम करने हेतु कंप्यूटर प्रोग्रामर्स दिनांक में वर्ष को 4 अंको में न लिख कर 2 अंको  में लिखने का फैसला किया इसका यह मतलब है की वर्ष में केवल अंतिम के 2अंक ही लिखे जायेगे। जिसस प्रोग्रामिंग का खर्च बहुत हद तक काम हो गया।
हालांकि कंप्यूटर तो प्रोग्रामिंग से ही चलता है तो 31 दिसंबर 1999 की शाम बाद कंप्यूटर 2000 में कैसे प्रवेश करेगा इसकी चिंता किसी ने नहीं की थी और न ही कंप्यूटर में वर्ष बदलने के लिए  कोई ऐसी प्रोग्रामिंग की थी जिसे  कंप्यूटर समझ सके की हमें (कंप्यूटर ) 2000 में प्रवेश करना है न कि 1900 में।
सब कुछ ठीक चल रहा था सभी जगहों पर कंप्यूटर का इस्तेमाल शुरू हो चुका था और  किसी ने इसके बारे में ध्यान भी नहीं दिया । फिर 1993 में एक "Computerworld मैगजीन" ने पहली बार Y2K समस्या को अपने एक आर्टिकल" Doomsday 2020" में प्रकाशित किया और अपने  इस आर्टिकल में बताया कि Y2K कैसे बहुत समस्या के रूप में आ सकती है। सारी दुनिया के सामने Y2K उस  सदी का सबसे बड़ा सॉफ्टवेयर बग था इसलिए हम इसे "millennium bug" के नाम से भी जानते हैं।

Y2K का प्रभाव-

उस समय कंप्यूटर का उपयोग सभी क्षेत्रों में किया जा रहा था सरकारी, गैर सरकारी सभी संस्थाओं में कंप्यूटर का उपयोग किया जा रहा था। इसका प्रभाव सभी क्षेत्रों में हो सकता था जैसे -
  • कंप्यूटर डाटा खत्म हो सकते थे, सॉफ्टवेयर संबंधित समस्याएं और तो और कंप्यूटर पूर्णतया बंद हो सकता था।
  • क्रेडिट कार्ड बंद हो सकते थे
  • बैंकिंग डाटा खत्म हो सकता था।
  • कंप्यूटर से जुड़े एयर ट्रेफिक कंट्रोल, पावर स्टेशन, राष्ट्रीय सुरक्षा प्रणाली जैसे कार्य रुक सकते थे।
लेकिन समय रहते हुए सभी को समस्या के बारे में पता चला और सभी देशों ने मिलकर काम किया । यूएसए, यूके ऑस्ट्रेलिया जैसे देश ने लाखों डॉलर खर्च किए और कंप्यूटर के प्रोग्रामिंग को सही कराया।आंकड़ों के मुताबिक उस समय लगभग 600 बिलियन डालर इस समस्या के समाधान में लगाए गए थे। और इस सॉफ्टवेयर बग भर पाया था।
कहीं-कहीं छोटी मोटी घटनाएं देखने को मिली थी जैसे जापान केनी की न्यूक्लियर पावर प्लांट में अलार्म बजने लगा था।ऑस्ट्रेलिया के बस टिकट मशीन, यूएसए के लॉटरी मशीन बंद हो गया थे।

भारत का योगदान-

इस समस्या के समाधान के लिए बहुत सारे सॉफ्टवेयर प्रोग्रामर की थी जिससे भारत द्वारा ही पूरी की गई थी। भारत ने काम खर्च में योग्य इंजीनियर पूरे विश्व को प्रदान किया जो अतुलनीय था। उस समय पूरे विश्व ने भारत का लोहा माना था भारत के सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री के इंजीनियर के द्वारा इस समस्या पर निजात आसानी से मिल सका । भारत में 1998 तक बहुत सारी कंपनियां जैसा टीसीएस, इंफोसिस स्थापित हो चुकी थीं।
1998 भारत IT sector  भारत के जीडीपी में 1.2% हिस्सेदारी थी जो आज बड़ कर 7% से 8%हो गया है।भारत की सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री को पूरे विश्व में एक प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त है।

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