इस वैश्विक महामारी के बीच पाकिस्तान ने दियामेर-भाषा बांध के प्रोजेक्ट को चाइना के साथ मिलकर बनाने की मंजूरी दे दी है।442 अरब के इस प्रोजेक्ट पर चीन की सरकारी कंपनी 'चाइना पॉवर' और पाकिस्तान के आर्म फोर्स की वाणिज्यक ईकाई 'फ्रांटियर वर्क्स ऑर्गेनाइजेशन' के समझौता हुआ है। पाकिस्तान की "डॉन"अखबार के मुताबिक इसमें चाइना पावर की 70% और पाकिस्तान के फ्रंटियर वर्क्स ऑर्गेनइजेशन(FWO) की 30% हिस्सेदारी रहेगी।पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने बताया कि इससे पाकिस्तान में लगभग 16500 नौकरियां मिलेंगी। पाकिस्तान सरकार के मुताबिक इस डैम आने वाले दिनों में 4500 मेगा वाट की हाइड्रो इलेक्ट्रिसिटी उत्पन्न करेंगी और साथ ही साथ सिंधु नदी पर स्थित तरबेला बांध की उम्र को 35साल बड़ा देगी।
यह मल्टी मेगा डैम प्रोजेक्ट सिंधु नदी पर बनाई जाएगी। सिंधु नदी तिब्बत के मानसरोवर झील से निकल के लद्दाख होते हुए पाकिस्तान में बहती है। यह पाकिस्तान के सिंचाई के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण नदी है इसलिए पाकिस्तान ने सिंधु नदी पर बहुत सारी बांधे बनवाए हैं लेकिन ऐसा पहली बार हो रहा है जब पाक अधिकृत कश्मीर में सिंधु नदी पर कोई बांध पाकिस्तान द्वारा बनवाया जा रहा है।
दियामेर-भाषा डैम प्रोजेक्ट को पाकिस्तान 1980 से ही आरंभ करने का प्रयास कर रहा है। 1998 में जब नवाज शरीफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री थे तो उन्होंने इस बांध की आधार संरचना बनाने के लिए world bank और एशियाई विकास बैंक से आर्थिक लोन के लिए गुहार लगाई थी लेकिन भारत ने इसका विरोध किया था।भारत का कहना था कि पीओके भारत का अधिकारी क्षेत्र और इस पर पाकिस्तान किसी प्रकार का निर्माण नहीं कर सकता है। जिसके बाद वर्ल्ड बैंक और एशियन डेवलपमेंट बैंक ने पाकिस्तान को इस बार को बनाने के लिए आर्थिक लोन देने से मना कर दिया था। भारत के कूटनीतिक दबाव के कारण अभी तक इस प्रोजेक्ट पर कोई काम नहीं हो रहा था।लेकिन जब से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान बने हैं तब से चाइना ने इमरान खान के सरकार से कहा है की दियामेर- भाषा डैम जो 1998 से अभी तक बना नहीं है उसके लिए उसके लिए हमसे आर्थिक मदद लीजिए और चाइनीज कंपनियों को इस प्रोजेक्ट के लिए मंजूरी दे। 2018 में भी चाइना ने इस इस डैम के निर्माण के लिए अपने सहायता देने की बात कही थी। भारत ने उस समय चाइना और पाकिस्तान दोनों के खिलाफ प्रोटेस्ट किया था। भारत के दबाव के बाद पाकिस्तान ने चाइना की सहायता को ठुकरा दिया था लेकिन अब पाकिस्तान ने चाइना के साथ इस बांध पर एक साथ कार्य करने के लिए समझौता किया है। अभी तक इन्होंने 5.8 बिलियन के प्रोजेक्ट पर मीडिया के सामने हस्ताक्षर किया है हालांकि यह बता दे कि इस प्रोजेक्ट लगभग 10 बिलियन खर्च आएगा। 2028 तक इस बांध को पूरा करने के लिए समय निर्धारित किया गया ।
भारत की इस पर प्रतिक्रिया-
भारत ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई है और पाकिस्तान को कड़े शब्दों में चेतावनी भी दी है लेकिन भारत को कहीं ना कहीं सोचना होगा की पाक अधिकृत कश्मीर में पाकिस्तान ने कैसे इस बांध के निर्माण की मंजूरी चाइनीज कंपनियों को दे दी है।और चाइना यह जानते हुए भी की यह एक विवादित भू-भाग है उसके बाद भी इस प्रोजेक्ट पर कार्य करने की सहमति बहुत सरलता से जता दी है। यह सोचने योग्य हैं कि चाइना भारत की संप्रभुता को हर प्रकार से चोट पहुंचाने में लगा है ।कुछ दिन पहले ही सिक्किम में भारत चीनी सैनिको के बीच झड़प हुई थी फिर लेह में भी चीनी लड़ाकू विमान भारतीय सिमा में दिखे थे परन्तु भारतीय सैनिको की मुश्तैदी से उन्हें पीछे हटना पड़ा इन सभी संकेत को देखकर भारत को भी सोचना होगा चाइना के प्रति हमारी defensive diplomacy पर इस समय विचार करने की आवश्यकता आ गई है।भारत को बड़ी परिपक्वता के साथ चाइना और पाकिस्तान जवाब देने की आवश्यकता है।


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