भारतीय सेना में शामिल होने का एक सुनहरा अवसर-

अगर आप भारतीय सेना में शामिल होना की सोच रहे हैं तो "Tour of duty" आपको एक अच्छा विकल्प प्रदान कर सकता है। बहुत सारे न्यूज़ एजेंसी में चर्चा किया जा रहा है कि भारत सरकार एक नई योजना के अंतर्गत भारतीय सेना में युवाओं को सेवा करने का अवसर प्रदान कर सकती है। 14 मई 2020 को भारत के CDS(Chief of Defence) मिस्टर विपिन रावत ने मीडिया से बात करते हुए इसके संकेत दिए लेकिन बता दे कि तभी तक भारत सरकार की तरफ से कोई इस प्रकार का आधिकारिक बयान नहीं आया है।

भारतीय सेना में अफसर बनने के लिए अभी दो रास्ते खुले हुए हैं। 
  1.  एनडीए या सीडीएस के माध्यम से परमानेंट कमिशन हो और पूरी जिंदगी तक अपनी सेवा प्रदान करें।
  2. या फिर OTS के माध्यम से शॉर्ट सर्विस कमिशन से भारतीय सेना में शामिल हो 10 से 14 वर्ष तक सेवा प्रदान करने के बाद सेवानिवृत्त हो जाए।
शॉर्ट सर्विस कमीशन के कुछ अफसरों को परमानेंट कमिशन में जगह मिल जाती है। भारतीय सेना में अफसरों की नियुक्ति पिरामिड संरचना के आधार जैसी है ज्यादातर अफसर कर्नल की पदों तक आते आते सेवानिवृत्त हो जाते हैं।

Tour of duty क्या है-

"Tour of duty" टर्म का प्रयोग अधिक रूप से अमेरिका में देखने को मिलती है अमेरिकी सेना में युवाओं को  4 या 6 वर्ष के टूर के लिए नियुक्त किया जाता है फिर उनकी सेवानिवृत्ति हो जाती हैं। सामान्य भाषा में कहें तो यह एक इंटर्नशिप या टेंपरेरी जॉब की तरह है।भारतीय समाचार पत्रों की माने तो भारत सरकार "Tour of duty" के इस प्रस्ताव में सेवा की अवधि 3 वर्ष रखी है भारतीय सेना का कहना है कि इस समय युवाओं के बीच अपने देश के प्रति देशभक्ति की भावना ज्यादे है और बहुत से युवा भारतीय सेना में एडवेंचर्स जॉब के रूप में अपना कैरियर बनाना चाहते हैं। इस सब को देखते हुए भारतीय सेना ऐसे प्रस्ताव पर विचार कर रही है। भारतीय सेना इस प्रस्ताव "Tour of duty" का नाम देगी या नहीं यह तय नहीं हुआ। यह भी बता दे भारतीय सेना शामिल होने के लिए भारतीय सेना के सभी मापदंडों पर खरा उतरना होगा। बौद्धिक और शारीरिक सभी प्रकार के परीक्षाओं में सफल होना पड़ेगा।

 Tour our of duty का महत्व

  • बहुत युवाओं सोचते है की मै सेना में शामिल हो लेकिन पूरी जिंदगी सेना में सेवा प्रदान न करे ऐसे युवाओं के लिए" Tour of duty" एक अच्छा विकल्प रहेगा।  


  • अनेकों  ऑफिसर्स सेवानिवृत्ति के बाद 33 -34 वर्ष की उम्र में कारपोरेट सेक्टर को ज्वाइन करते हैं और 10 से 12 साल की अपनी सेवा कारपोरेट सेक्टर में प्रदान कर पाते। कारपोरेट सेक्टर का मानना है कि अगर ऑफिसर्स कम समय में  सेवानिवृत्ति होते  और इसके पश्चात 25 से 27 वर्ष की उम्र में हमारी संस्था ज्वाइन करेंगे तो इससे कारपोरेट सेक्टर को भी अच्छा होगा। ये सब संभावाएं भी "टूर ऑफ ड्यूटी" पूरी हो सकती हैं।


भारत सरकार एक और विकल्प के बारे में सोच रही है जिसमें CAPF (Central Armed Police Forces) के जवानों को भारतीय सेना में 7 वर्षों के लिए शामिल किया जाए भारतीय सेना का मानना है कि ऐसे जवानों को अगर शामिल करते हैं तो उनके ट्रेनिंग के समय बचेंगे और इन्हें तुरंत नियुक्त की जा सकती हैं । CAPF s को भी इससे फायदा होगा 7 वर्ष की सेवा के बाद अपने पेरेंट्स आर्गेनाईजेशन में चले जाएंगे।


भारत सरकार की दूरगामी सोच-

वहीं दूसरी तरफ अगर कोई अफसर 3 साल के लिए नियुक्त होगा तो भारत सरकार को लगभग 80 से 85 लाख खर्च करने होंगे और इसी प्रकार अगर भारतीय सेना में कोई जवान अपनी 17 वर्ष की सेवा प्रदान करने के बाद सेवानिवृत्त होने के बजाएं 3 वर्ष में सेवानिवृत्त होता है तो  11.5 करोड़ रुपए की बचत ओगी।अगर कोई अफसर या जवान अपने टूर आफ ड्यूटी के दौरान किसी प्रकार की भी घटना में उनकी कैजुअल्टी होती है तो उन्हें वह सब सुविधाएं प्रदान की जाएगी जो रेगुलर अफसरों या जवानों को प्रदान की जाती है।मुख्य रूप से भारत सरकारी यह चाहती है कि डिफेंस बजट में पेंशन पर होने वाले खर्च को कम किया जाए और इस खर्च को भारतीय सेना के आधुनिकरण पर खर्च किया जाए।


आंकड़ों के मुताबिक 2020-21 के बजट में डिफेंस पेंशन बजट 133825 करोड़ रखा गया है जो 2005-06 के बजट में 12715 करोड़ था। 13 वर्ष में यह बजट लगभग 10 गुना बढ़ गया है। दूसरे रूप में ही देखें तो इस समय का पेंशन बजट भारत सरकार के कुल खर्च का 4.4% है और डिफेंस बजट का 28.4% है। हालांकि डिफेंस बजट का 57 % सैलरी और पेंशन के रूप में खर्च होता है।

 इन सब खर्चों को कम करके भारतीय सेना के आधुनिकरण पर ये पैसे खर्च करने का सरकार विचार बना रही है। भारतीय सेना का पेंशन आवंटन खर्च  कैपिटल एक्सपेंडिचर से इस वर्ष 15291 करोड़ रुपए बढ़ गया है आपको बता दें कि कैपिटल एक्सपेंडिचर सेना को आधुनिकरण और नए हथियारों के खरीद के लिए खर्च किए जाते हैं।"Tour of duty" सेना के आधुनिकरण में सहायता प्रदान कर सकता है|

 तक्षशिला इंस्ट्यूशन नामक एक थिंक टैंक सेना में 10% workforce इसी मॉडल से नियुक्त का विचार सरकार के सामने प्रस्तुत किया है। लेकिन अभी के लिए प्रारंभिक चरण में 100 ऑफिसर और 1000 जवानों को नियुक्त किया जाएगा और इस प्रकार से खर्च को कम कर नया हथियार और नए टेक्निक्स पर खर्च किए जाएंगे। ऐसा नहीं है कि सभी नियुक्ति इसी आधार पर होगी।एक और बात और भी है कि भारतीय सेना चाहती है की उसकी fighting force नवजवान रहे "Tour of duty model" से ये भी संभव हो सकता है।देखना है की भारत सरकार इस प्रस्ताव पर किस की सहमति प्रदान करती है| 


इस वक्त सरकार अतिरिक्त बजट ना होने के कारण सरकार पर यह दबाव है कि सेना बजट को कुछ कम किया जाए। समाचार पत्रों में प्रकाशित इस आर्टिकल के एक हिस्से में एक भारत सरकार द्वारा  ऑफिसर्स पर खर्च किए गए आंकड़ों को प्रदर्शित किया है। अगर कोई ऑफिसर शॉर्ट सर्विस कमिशन के माध्यम से निव्युक्त होता है और 10 वर्ष में सेवानिवृत्त होता है लगभग 5.12 करोड़ रुपए या फिर 14 वर्ष में सेवानिवृत्त होता है तो 6.83 करोड़ पर भारत सरकार को खर्च करने पड़ते हैं।


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