ब्रिटेन ने एक नया D10 नामक अंतरराष्ट्रीय समूह बनाने का प्रस्ताव अमरीका के सामने रखा है। जिसमे सभी महत्वपर्ण लोकतांत्रिक देशो का एक अपना समूह बनाने की बात कही गई हैं। इस समूह का मुख्य उद्देश्य 5G टेक्नोलॉजी पर जो भी काम इनके देश में हो वो सभी अपने समूह के ही देश की कंपनियों के द्वारा किए जाएं और बाहर की कोई कंपनी को इस काम में शामिल नहीं किया जाए मतलब की चाइना की कंपनियों जैसे की Huawei को इस व्यापार के शामिल नहीं करने की बात कहीं गई है।


D10 मुख्यतः G7 में आने वाले देशों ( यूएस, यूके, इटली, जर्मनी, फांस, जापान और कनाडा ) के साथ भारत, दक्षिण कोरिया और आस्ट्रेलिया को शामिल करके बनाया जाएगा।

5G टेक्नोलॉजी

5G क्रांति मानव जाति का एक बहुत बड़ा कदम होगा। 5G fifth generation का नेटवर्क एक वायरलेस कनेक्शन और अधिक स्पीड के साथ बेहतर कवरेज़ भी मिलेगा। एक बार 5G नेटवर्क का विस्तार हो गया तो आप पाएंगे की बहुत सी चीजें में बड़ा बदलाव आ गया है। सड़कों पर ड्राइवरलेस कर, internet on things और भी बहुत कुछ बदल जाएगा। 


अब इस बदलाव के लिए हमें 5G के बहुत सारे यंत्रों की आवश्यकता पड़ेगी और ऐसा भी नहीं है कि अभी के टॉवर में कुछ बदलाव करके 5G नेटवर्क में चले जाएंगे। एक देश को 5G में जाने के लिए आरबो रुपए खर्च करने होते हैं।और यह एक बहुत बड़ा व्यापार भी है।

विश्व भर में मुख्य रूप से तीन कि कंपनी ही है जो 5G नेटवर्क से सम्बन्धित यंत्रों को बिचती है। ये कंपनी है Nokia, Ericesson और चाइना की Huawei. इसमें से Nokia और Ericesson की ज्यादातर यंत्र बहुत महगे आते हैं इसलिए बहुत से देश चाइना की Huawei कंपनी के यंत्रों का प्रयोग करती है।

अब समस्या ये है कि अमेरिका की सुरक्षा एजेसियों का मानना है कि चीन की कंपनी Huawei के यंत्रों के माध्यम से चीन जासूसी करता है। इसलिए अमेरिका ने Huawei कंपनी को मई 2021 तक प्रतिबंधित कर दिया है। अमेरिका ने भारत, जापान और बहुत से देशों को चेतावनी भी दी थी की अगर आप के देश में Huawei कंपनी के यंत्रों का प्रयोग होगा तो अमेरिकी कम्पनी आप के यहां कोई व्यापार नहीं करेगी। हालांकि इसका पूर्ण रूप से पालन नहीं किया गया।

 भारत पर इसका प्रभाव

भारत सरकार की नीतियों की वजह से अभी टेलीकॉम सेक्टर में कार्यरत कंपनियां जैसे कि एयरटेल, रिलांस का जिओ और आइडिया-वोडाफ़ोन में से दो कम्पनी एयरटेल और आइडिया- वोडाफ़ोन AGR text का बोझ बड़ गया है। जिससे टेलीकॉम सेक्टर अभी घाटे में चल रही है। और सरकार से सहयोग नहीं मिल रहा है।

आप को बता दे की covid-19 महामारी की वजह से देश जो लॉकडाउन लगा था उस वक्त भारत की जीडीपी में टेलीकॉम सेक्टर ने 35% का योगदान दिया था। इसके बाद भी सरकार की तरफ़ इन कंपनियों को कोई छूट नहीं दिया गया है।

अगर भारत में 5G आता है तो संभवत इन कंपनियां कैश की कमी की वजह से Nokia  महगेे यंत्रों के बजाय Huawei कंपनी के सस्ते यंत्रों का प्रयोग करेगी।

दूसरी बात यह है कि भारत सरकार इसे एक अवसर की तरह देखें और 5G में प्रयोग किए जा रहे यंत्रों को भारत में ही किसी देश की मदद से बनाना शुरू करें। इसके लिए बहुत से आवश्यक है की सरकार बहुत से महत्वपर्ण बदलाव करे जैसे की कंपनियों को कम दाम में भूमि प्रदान करे , लेबर लॉ में बदलाव करे जिससे भारत में FDI आ सके। जो बहुत हद तक संभव भी है बस सरकार को सोचने की आश्यकता है।

देखना है कि भारत 5G क्लब की D-10 समूह में शामिल होता है की नहीं। परंतु इस प्रस्ताव से चाइना नाखुश जरूर होगा और आने वाले समय में अगर D-10 समूह में प्रस्तावित देशों का समूह बनता है। तो  इस पर प्रतिक्रिया देते हुए चीन इसका विरोध करे या फिर D-10 समूह के सापेक्ष कोई अपना एक नया समूह बनाए जिसमें पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और रूस की शामिल करे। देखना है कि आने वाले समय में क्या होता है।

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