रियल सुपरहीरो ऑफ इंडिया सोनू सूद ने वो काम कर के दिखाया जो सरकारों नहीं कर सकी। सोनू सूद ने प्रवासी मजदूरों को उसके गृह राज्य पहुंचा कर एक मिसाल कायम किया है और सभी के दिलों में एक अलग पहचान बना ली है। 24 मार्च से जैसे ही लॉकडाउन शुरु हुआ सबसे ज्यादा अगर किसी को प्रॉब्लम हुई है तो वह मजदूरों को हुई है। छोटे शहरों से बड़े शहरों मुंबई, दिल्ली में काम करने के लिए जाते हैं। लॉकडाउन शुरू होते ही न पैसा न ही रहने का ठिकाना क्या करें ये मजदूर हजारों हजारों किलोमीटर पैदल चलने पर मजबूर हो गए।




कुछ ही दिन पहले एक लड़की ज्योति कुमारी की ख़बर तो आपने सुनी ही होगी। जिसने अपने पिता को साइकिल पर बैठा कर 1200 किलोमीटर दिल्ली से दरभंगा तक की यात्रा 7 दिनों पूरा कर अपने गृह राज्य दरभंगा पहुंची थी। वह भी मई का महीना है जब इतनी ज्यादा गर्मी है ।


अब सोनू सूद प्रवासी मजदूरों की इसी हालत देख कर एक्शन में आ गए और प्रवासी मजदूरों को उनके घर भेजने की वयवस्था करना शुरू कर दिया। सोनू ने अपने हाल ही में इंटरव्यू में कहा था कि मैं जब तक सभी मजदूरों उनके घर तक नहीं छोड़ देता तब तक चैन से नहीं बैठूगा। सोनू सूद का व्यक्तित्व बहुत अच्छा है। समाज के लिए सोचते हैं और लोगों के हित के लिए बहुत से सामाजिक कार्य करते रहते हैं। अब जब इस तरीके की कंडीशन हो गई तो सोनू ने बहुत अच्छा कार्य किया और बहुत से प्रवासी मजदूरों को उनके घर भेजा। इनका टारगेट है कि हर किसी को उनके घर भेजा जाए।


सोनू सूद बताते हैं कि जब भी घर पहुंचते हैं तो मुझे बहुत सारे मैसेज भेजते हैं जिससे मैं बहुत खुश हो जाता हूं यही बात है। लॉकडाउन में हर कोई अपने स्तर पर मदद करने की कोशिश  है सरकार ने भी बहुत कोशिश की है इन प्रवासी मजदूरों की मदद के लिए।


सोनू सूद की लाइफ 


सोनू सूद की बात करें तो 1973 नहीं जन्मे है पंजाब के मोगा डिस्ट्रिक्ट से आते हैं। इनकी माताजी सरोज सूद जो के प्रोफेसर थी और इनके पिताजी शक्ति सूद एक बिज़नस मेन है। सोनू सूद बताते मेरी मम्मी चाहती थी कि मैं पढ़ लिखकर प्रोफेसर बनो। लेकिन मुझे एक्टिंग का शौक था।


इलेक्ट्रॉनिक्स में सोनू सूद ने इंजीनियरिंग की है लेकिन एक्टिंग का इनको बड़ा शौक था। सोनू सूद बताते हैं कि जब मैं मुम्बई में संघर्ष कर रहा था उस वक्त मेरी मम्मी ने मुझे हमेशा इंस्पायर किया करती थी और मुझे पत्र लिखा करती थी। जब मैंने कहा कि हम लोगो की बात तो रोज होती है फिर भी पत्र क्यों लिखती हूं तो मेरी मां ने कहा था की आज तो मैं हूं लेकिन एक जब मै नहीं रहूंगी तो इन पत्रों की बहुत ज्यादा जरूरत पड़ेगी। सोनू सूद अपने माता जी के बहुत करीब थे।


अपनी पढ़ाई पूरा करने के बाद सोनू सूद अपना लक आजमाने मुम्बई आ गए।अपने परिवार से कहा कि मुझे कुछ दिन का समय दे दीजिए अगर सफलता मिली तो ठीक नहीं तो पिताजी का बिजनेस तो है ही। बताते हैं कि 2 साल तो यूं ही निकल गए पता ही नहीं चला कि हो क्या हो रहा है। जहां पर भी जाता था लाइन लगी रहती थी ऑडिशंस के लिए तो मुझे बहुत रिजेक्शन खाने पडे है 2 साल तक तो मुझे काम ही नही मिला।


सोनू सूद एक घटना का जिक्र करते हुए बताते हैं कि उन्हें एक एड फिल्म में काम करने को मिला जिसमे 3000 प्रतिदिन  मिलना था सोनू सूद काम करने को तैयार हो गए और जब काम करने गए तो देखा की उनके जैसे 20 लोग और खड़े हुए थे। मुंबई में सरवाइव करना है तो संघर्ष करना ही करना ही पड़ेगा हर कोई संघर्ष करता ही है। 

डेढ़ दो साल कुछ समझ नहीं आया क्या हो रहा है लेकिन उसी बीच इन्हें तमिल मूवी में काम करने का मौका मिला। क्योंकि सोनू सूद की बॉडी बहुत बढ़िया था। सोनू सूद ऐसे कलाकार हैं जिनके फिटनेस की हर कोई तारीफ करता है। 

 

सोनू सूद चेन्नई पहुंचे वहां पर फिर इन्होंने अपनी कैरियर की शुरूआत तमिल, तेलुगू फिल्मों से की इन्हें तमिल, तेलुगू डायलॉग दोगुनी मेहनत करके याद करनी पड़ती थी।फिर भी इन्होंने सभी फिल्मों किया। उसके बाद फिर 2002 में बॉलीवु़ड मूवी शहीद ए आजम भगत सिंह से बॉलीवुड मूवीस में करनी शुरू की उसके बाद युवा (2004),  आशिक बनाया आपने, दबंग(2010) में छेदी लाल का किरदार निभाया जो बहुत नाम कमाया  का आर राजकुमार, सिम्मबा जैसे फिल्मों में बहुत अच्छे किरदार निभाया।


घर भेजो अभियान की शुरुआत 


 सोनू सूद अपनी तरफ से लॉकडाउन में लोगो की काफी मदद कर रहे थे। सोनू सूद बताते है की  जब से लॉकडाउन शुरू हुआ है तब से हम देख रहे थे कि लोगों को बहुत दिक्कत हो रही है जो गरीब है उन्हें खाना नहीं मिल रहा था तो हम अपनी तरफ से पूरी मदद करने की पूरी कोशिश कर रहे थे।

सोनू सूद ने बहुत कुछ किया है यह तो अभी एक न्यूज़ है तो सामने आई है। क्या आप को पता है इन्होंने डॉक्टर के लिए 15000 ppe किट वितरण किया है। इनका जो होटल है जुहू में उसे मेडिकल स्टाफ के रहने के लिए खोल दिया है की आप यहां पर रह सकते हैं। और काफी समय से सड़कों पर जरूरत मंदो को उनकी टीम खाना बांट रही थी।

लेकिन 9 मई को दोस्तों कुछ ऐसा हुआ जिससे इन्होंने एक बहुत बड़ा फैसला लिया। 9 मई को जब उनकी टीम एक सड़क पर खाना बांट रही है। तभी कुछ लोगो दिखायी दिये जो कर्नाटक पैदल ही जा रहे थे तो सोनू सूद ने उनसे पूछा आप लोग कैसे जाओगे तो उन्होंने कहा कि कोई साधन तो है नहीं इसलिए पैदल ही जाएंगे।


सोनू सूद इंटरव्यू में कहा कि जब मैंने देखता की लोग हजारों हजारों किलोमीटर पैदल जा रहे हैं तो मुझे नींद नहीं आती थी। तो फिर मैंने इन लोगो की मदद करने का फैसला किया । बताते हैं कि मैं बहुत ज्यादा लकी हूं की मुझे भगवान ने इतना कुछ दिया है जिसकी वजह से मैं मदद कर पा रहा हूं ।


11 मई को सोनू सूद ने बस का की व्यवस्था किया और 350 मजदूरों बिठाया कर उसे कर्नाटक के लिए उसे रवाना कर दिया। यह पहली बस थी इसके बाद बसो के माध्यम से प्रवासी मजदूरों को उनके गृह राज्य पहुंचाने का सिलसिला शुरू हो गया। सोनू सूद ने बकायदा हेल्पलाइन नंबर दे दिया है और कहा है की कोई भी प्रॉब्लम में है तो इस नंबर पर कॉल मदद करने की पूरी कोशिश की जायेगी।  


 सोनू सूद को एक नया नाम मिल गया है " सुषमा स्वराज" । इस मुहिम सोनू सूद की बचपन की दोस्त नीति गोयल ने बहुत साथ दिया इन्होने घर भेजो मुहीम चला दिया जिससे बहुत सहायता मिली है। यह बताते हैं क जब मैंने बस को रवाना किया सबकी आंखों में आंसू और मुस्कान होती है जो मुझे और मेहनत करने की शक्ति देती है। 


प्रवासी मजदूरों को घर भेजना ही कोई आसान काम नहीं है। बस से जा रहे लोगो के लिए खाने की व्यवस्था करना , उनके मेडिकल जाँच करना , उनके राज्य की सरकार से बात करे अनुमति लेना और भी बहुत कुछ करना होता है। इस मुहीम में बहुत लोग सोनू सूद के साथ जुड़ते गए और सभी के सहयोग से इस प्रवासी मजदूरों की मदद ही पायी। अभी तक लगभग 17000 मजदूरों को उनके घर भेज चुके है । 29 मई को इन्होने 177 महिलाओं को केरल से ओडिशा तक चार्टर फ्लाइट से भेजा । फिर  1 जून को इन्होने ट्रैन से हजारों उत्तर प्रदेश ,बिहार  के लिए भेजा ।




गौरतलब है की सोनू सूद इस मुश्किल समय में लोगो की मदद कर रहे तो इसको दुआएं भी बहुत मिल रही है। इस सराहनी कार्य के लिए सोनू सूद को नेता, अभिनेता सभी लोग तारीफ कर रहे है। सोनू सूद का कहना है की जब तक एक एक प्रवासी भाई को घर नहीं भेज देता तब तक ये अभियान चलता रहेगा।      



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