केरल के मलप्पुरम जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई हैं। एक गर्भवती हथिनी की मृत्यु पटाखों से भरा अनानास खाने से हो गई। घटना की जानकारी वन विभाग के अधिकारी मोहन कृष्णान्न द्वारा फेसबुक पेज पर हथिनी के फोटो के साथ किए गए पोस्ट के माध्यम से मिला। 



मामला बीते बुधवार 23 मई का जब एक हथिनी खाने की तलाश में जगल के पास वाले गांव आ गई और जब गांव घूम रही थी तभी हथिनी ने पटाखे से भरा अनानास खा लिया।अब पटाखे के फटने की वजह से हथिनी गंभीर रूप से घायल हो गई औेर उसकी मुंह पर घाव हो गया। घाव से परेशान हथिनी नदी में जा कर खड़ी हो गई और शनिवार को उसकी नदी में ही मृत्यु हो गई। 

मामले के वायरल होने पर अज्ञात लोगों के नाम पर wildlife protection act 1972 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया। केंद्र सरकार ने भी हथिनी हत्या मामले को गंभीरता से लिए है । केंद्रीय वन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि मामले की गहराई से जांच की जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा की भारतीय संस्कृति में तो ऐसा नहीं है की किसी जानवर को पटाखा खिलाकर जान ले ली जाए।




सोशल मीडिया पर भी इस खबर को जिसने सुना सभी ने अपन दुख और गुस्सा जताए । लेकिन सवाल ये उठता है कि किसी ने जानबूझ कर उस गर्भवती हथिनी को पटाखे से भरा अनानास खिलाया या फिर अनजाने में। लेकिन क्या किसी को अनानास में पटाखे भर कर रखना चाहिए। ये सोचने वाली बात है कि  शांत घाटी में आस पास ऐसे ही संवेदनशील इलाका है जहां हाथी आम तौर पर घूमते हुए दिखाई देता है वहां कोई अनानास में पटाखे भर रखे ये वाकई में खतरनाक हैं। 
लोगों को सोचना चाहिए कि ऐसा कोई काम न करे जिससे जानवरो को इस प्रकार की गंभीर घटनाओं की वजह से जन गवानी पड़े।

23 मई को गांव में हथिनी को घूमते हुए देख जाने पर गांव के लोगो ने वन विभाग को सूचना दिया तब 24 मई के वन विभाग के एक अधिकारी गांव के आकार देखा तो हथिनी घूम रही थी और उसके मुंह में गंभीर घाव जिसकी वजह से वह कुछ खा भी नहीं पा रही थी। इस समय तक किसी को पता नहीं था कि हथिनी गर्भवती भी है।



 वन विभाग के अधिकारी सुरेंद्र कुमार ने बताया है कि हथिनी घाव से परेशान हो अपने मुंह तथा सुड को वेल्लियार नदी के अंदर डाल कर खड़ी थी। वन विभाग के अधिकारियों के द्वारा बचाने की बहुत कोशिश की गयी परन्तु 27 मई को इसकी मृत्यु नदी में ही हो गयी फिर पोस्टमॉर्टम में पता चला की वो गर्भवती थी। 

 वन विभाग के अधिकारी मोहन कृष्णान्न ने फेसबुक पर  एक पोस्ट में लिखते है की हथिनी ने अपने six senses की वजह से जान गई थी कि वह मारने वाली है इसलिए नदी में खड़े होकर की जलसमाधि ले ली। वो लिखते हैं कि इतना परेशान हो के बाद भी हथिनी किसी को हानि नहीं पहुंचाया। 



हालाकि वन विभाग ने हथिनी को बचाने की पूरी कोशिश की दो हाथी जिनका नाम सुरेंद्रन और नीलकंठन को भी लाया गया। अधिकारियों का मानना था कि हाथीयों को देखकर हथिनी कुछ प्रतिक्रिया देगी लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। हथिनी नदी में ही मर गई। बहुत दुख की बात है जिस देश में जानवरों की भी पूजा होती हैं वहां इसी घटना निंदनीय है। हथिनी की हत्या करने वालों को दण्ड अवश्य मिलना चाहिए। 

 

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