भारत और चीनी सैनिक जो लद्दाख के गलवां घाटी में पिछले महीने भर से आपने-समाने खड़ी थी। अब वह धीरे-धीरे पीछे हट रही है। दोनों तरफ के सैनिक जो महत्वपर्ण स्थान है वहां से पीछे हट रही है। लेकिन पेंगोंग झील में अभी भी स्थिति पहले के समान है। लेकिन यह जो मूव है वह बहुत महत्वपर्ण है और इससे उम्मीद जताई जा सकती हैं कि जो लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) तनाव बना हुआ है वो आने वाले समय में बातचीत के माध्यम से खत्म किया जा सकता है।
आप को बता दे की अभी भी पूर्वी लदाख में भारत चीन सीमा पर जो तनाव है उसे पूर्णतया खत्म नहीं हुआ है तनाव को कम करने के लिए बातचीत चल रहा है।
भारत और चीन के बीच जो अभी जो सीमा विवाद चल रहा था वो मुख्य रूप से लदाख़ के लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर गलवान वैली में , हॉटस्प्रिंग्स एरिया में और पेंगोंग त्सो लेक में दोनों देश की सेना आमने सामने खड़ी थी। लेकिन अभी के लिए जो खबर आ रही है वह यह है कि गलवान वैली में चीनी सैनिक 2 से लेकर 3 km तक पीछे जा चुके हैं और भारतीय सेना भी करीब 1 km तक पीछे जा चुके हैं। हॉटस्प्रिंग्स एरिया में भी भारत और चीन के सैनिक पीछे हटे है।
पेंगोंग त्सो लेक में भी चीनी सैनिकों ने जो अस्थाई बंकर बना रखे थे और जो उन्होंने इंटरसेप्टर बोटो तैनात किए थे। उसे हटाना शुरु कर दिया है। यहां पर चाइना ने 15 इंटरसेप्टर बोट और 124 वाहन पीछे किया है। लेकिन अभी भी दोनों देशों की सेनाएं आमने सामने खड़ी है। तनाव अभी भी बना हुआ है।
पेंगोंग त्सो लेक विवाद
पूर्वी लदाख में पेंगोंग त्सो लेक जो आज के समय बहुत ही चर्चा में है वहां बहुत ही लंबे समय से भारत चीन के बीच सीमा विवाद होता रहा है। 1962 की लड़ाई के बाद ही ये लेक भारत और चीन के बीच विभाजित किया गया था लेकिन यहां पर लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल कहां से शुरू होती है। इसका एक चाइनीस वर्जन है और एक इंडियन वर्जन है। पैगोंग त्सो इलाके में चीनी सैनिक भारतीय सेना की पेट्रोलिंग टीम को फिंगर 4 इलाके से आगे नहीं जाने दे रहे हैं। फिंगर 4 इलाके से आगे फिंगर 8 तक भारत LAC मानता है लेकिन अब चीनी सेना द्वारा फिंगर 4 से आगे भारतीय सैनिकों को पेट्रोलिंग नहीं करने दी जा रही है।
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| पोंगोग त्सो लेक भारत चीन LAC वर्जन |
पिछले कुछ महीनों से चीनी सैनिकों द्वारा भारतीय सेना जो पोंगेंग त्सो लेक में पेट्रोलिंग कर रहे थे उन्होंने रोकना शुरु कर दिया था। अब यहां पर दोनों तरफ सेनाo अपने बोट को धीरे-धीरे पीछे किया जा रहा है। यह एक सकारात्मक पहल है। मगर अभी भी स्टैंडर्ड अप खत्म नहीं हुआ है।
भारत, चीन पर विश्वास नहीं कर सकता है इसलिए भारत ने लाइन आफ एक्चुअल कन्ट्रोल (LAC) पर अपनी सेना को तैनात कर दिया है।
6 जून को भारत और चीन दोनों सेनाओं के बीच कमांडर लेवल की बैठक हुए थी। एक सकारात्मक माहौल में बातचीत पूरा हुए उसके बाद LAC के पास कुछ जगहों पर दोनों सेनाओं पीछे हटी है परंतु पोंगेग त्सो लेक पर उस दिन भी कोई सहमति नहीं हुए थी। उम्मीद है कि आने वाला कुछ हफ्तों या कुछ महीनों में पूरा स्टैंडर्ड अप खत्म हो जाएगा।
आपको यह भी बता दे कि यह ख़बर की पहले बस मीडिया रिपोर्ट्स था की बाद में चाइना के विदेश मत्रालय ने कंफर्म कर लिया चाइना की विदेश मत्रालय के स्पोक्समैन से पूछा गया कि क्या इंडियन और चाइनीस सैनिक बॉर्डर से पीछे हट रहे हैं तो उन्होंने बताया कि बिल्कुल इंडिया और चाइना सैनिक दोनों धीरे धीरे पीछे हट रही है।
भारत का इस मामले में रुख
अगर भारत चीन सीमा स्टैण्ड अप खत्म हो जाता है तो यह भारत की एक बहुत बड़ी जीत होगी। क्योंकि चीन की मुख्य परेशानी भारत द्वारा बॉर्डर के आस-पास बहुत ही तेजी से सड़के बनाना, इन्फ्रास्ट्रक्चर डिवेलप करना है और भारत ने खुले तौर पर कह दिया है कि भारत सीमा पर सड़के बनाना बंद नहीं करेंगे उल्टा सरकार ने सड़कों को अब और ज्यादा तेजी से बनाने के लिए अतिरिक्त बजट आवंटित कर दिया है।
भारत चीन सीमा पर भारत की जो सबसे उत्तरीय पोस्ट है उसको जोड़ने के लिए Darbuk-Shyok- दौलत बेग ओल्डी (DS - DBO) सड़क भी को भी भारत बनाना जारी रखेगा।
साथ ही साथ लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर और भी नई सड़को का निर्माण निकट भविष्य में होते रहेगा।
भारत का रुख एक दम साफ़ है।भारत का कहना है कि हम किसी भी थर्ड पार्टी भारत चीन सीमा पर इन्वॉल्वमेंट नहीं चाहते। यहां तक की भारत ने यह भी साफ कहा बार्डर विवाद को लेकर हमारे प्राइम मिनिस्टर मोदी और डोनल ट्रंप के बीच कोई बातचीत नहीं हुई है।
चाइना की सोच क्या है?
मगर यह बहुत बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या हमें चीन के सैनिकों के पीछे हटने का खुशी मनाना चाहिए या फिर चीन के चाल को समझने की कोशिश करनी चाहिए। अगर लार्जर पिक्चर देखा जाए तो समझ में जाएगा कि चीन ने ऐसा क्यों किया :-
जहां covid- 19 की वजह से बहुत से देख चीन को जिम्मेदार ठहराया रहे हैं वहीं चीन देशों का ध्यान भटकना ही नहीं बल्कि कुछ देखना चाहता था कि भारत का इस मामले पर क्या रुख रहता है। साथ ही साथ यह भी समझना चाहता था कि अगर चीन LAC पर चीनी सैनिकों को बड़ता है तो भारत का क्या स्टैण्ड रहता है और क्या भारत सड़को का निर्माण रोकता है या नहीं। इसके अलावा इस मामले पर अन्य देशों मुख्य रूप से यूएस के रुख को देखना चाहता था।
ओवरऑल चीन केवल covid-19 से ध्यान ही नहीं भटकना चाहता था बल्कि क्षेत्र में सभी विश्वव्यापी राजनीति को समझना चाहता था। भारत को सजग रहना होगा ।




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