विजय माल्या के प्रत्यर्पण की मिली मंजूरी 1 महीने के अंदर लाया जा सकता है भारत-
विजय माल्या के एक्सपीडिशन केस के बारे में भारत सरकार और भारतीय जांच एजेंसियों के लिए एक बहुत अच्छी खबर है कि यूके में विजय माल्या के पास जो लीगल ऑप्शन थे वह पूरी तरह से समाप्त हो चुके हैं ब्रिटेन के कोर्ट में उनकी आखरी अपील खारिज हो चुकी है तो अब उन्हें 1 महीने में भारत लाया जा सकता है। भारत सरकार की तरफ से इकोनामिक ऑफेंडर घोषित किए जा चुके बिजनेसमैन विजय माल्या को भारत लाने के लिए भारत सरकार और उसकी जांच एजेंसियां पिछले 3 साल से यूके की अदालतों में एक कानूनी लड़ाई लड़ रही थी और इस लड़ाई में आखिरकार भारत की जीत हुई है। जो आखरी अपील विजय माल्या कर सकता थे उसने युके हाईकोर्ट में अपील किया था उसका कहना था कि मैं सुप्रीम कोर्ट तक जाना चाहता हूं लेकिन यूके के उस हाईकोर्ट ने मना कर दिया है कोर्ट कहना है की आपका केस ऐसा नहीं है कि आपको सुप्रीम कोर्ट तक जाने की इजाजत दी जाए तो जो हाई कोर्ट का निर्णय है वही फाइनल होगा और निर्णय यह था कि विजय माल्या को भारत वापस भेजा जा सकता है यानी कि माल्या का प्रत्यर्पण यूके से भारत को किया जा सकता है और जैसे ही कोर्ट का यह फैसला आया है तो अब यूके की सरकार के पास 28 दिन का समय है जिसमें प्रत्यर्पण की सभी कार्रवाई हो जानी चाहिए तो इसलिए उम्मीद है कि 1 महीने के अंदर ही विजय माल्या को वापस भारत लाया जा सकता है।
लेकिन विजय माल्या अभी भी ट्विटर पर पहले की तरह भारत सरकार कोई ऑफर दे रहे हैं कि मैं अभी भी पैसा देने को तैयार हूं पैसा ले लो और केस क्लोज कर दो लेकिन यह संभव नहीं है कानूनी कार्रवाई है वह अपने स्तर पर होगी।
विजय माल्या के आरोप-
विजय माल्या की कंपनी किंगफिशर एयरलाइंस लिमिटेड ने एक बहुत बड़ा लोन लिया था कई बैंकों से लोन लिया गए थे और उनकी नियत नहीं थी की उस लोन को चुकाया जाए। मल्टीपल लोन हैं जिसका कुल अमाउंट लगभग 10,000 करोड़ के आसपास है। माल्या के खिलाफ कई जांच एजेंसियां केस कर चुकी हैं या फिर उन्हें पूछताछ के लिए बुलाना चाहती हैं जिसमें एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED), सीबीआई ,सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस(SFIO) और सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) शामिल है।
चीटिंग, मनी लांड्रिंग जैसे पर्सनल केस भी माल्या के खिलाफ दर्ज।
चीटिंग, मनी लांड्रिंग जैसे पर्सनल केस भी माल्या के खिलाफ दर्ज।
विजय माल्या को यूके से लाने के लड़ी गयी लंबी लीगल प्रक्रिया-
2015 में ही इन सभी केसो में माल्या के खिलाफ जांच जब तेज होनी शुरू हुई तो ऐसा लग रहा था कि माल्या जल्द ही सलाखों के पीछे होगा उसी समय वह चोरी छुपे भारत से लंदन पहुंच गया। और जब मार्च 2016 में वह लंदन में पब्लिक ली बाहर है तो सभी को पता चला की माल्या लंदन में है।
फिर फरवरी 2017 में भारत सरकार की तरफ से प्रत्यर्पण के लिए एक रिक्वेस्ट यूके की सरकार, वहां के गृह मंत्रालय को भेजी गई और उसके बाद वहां की पुलिस एक्टिव हुई अप्रैल में विजय माल्या को गिरफ्तार किया गया लेकिन कुछ ही हफ्तों बाद उन्हें बेल पर रिहा कर दिया गया। अक्टूबर 2017 में फिर से पुलिस ने उन्हें अरेस्ट किया फिर से बेल पर रिहा कर दिया और उस समय यह मामला वहां के लोअर कोर्ट में चल रहा था फिर लंदन के एक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने दिसंबर 2018 में अपना फैसला सुनाया कि भारत सरकार की तरफ से जो रिक्वेस्ट आई है वह सही है और विजय माल्या को भारत भेज दिया जाना चाहिए उनका प्रत्यर्पण हो सकता है ऐसा कुछ भी नहीं है कि उन्हें यहां पर रोका जाए।
फिर फरवरी 2017 में भारत सरकार की तरफ से प्रत्यर्पण के लिए एक रिक्वेस्ट यूके की सरकार, वहां के गृह मंत्रालय को भेजी गई और उसके बाद वहां की पुलिस एक्टिव हुई अप्रैल में विजय माल्या को गिरफ्तार किया गया लेकिन कुछ ही हफ्तों बाद उन्हें बेल पर रिहा कर दिया गया। अक्टूबर 2017 में फिर से पुलिस ने उन्हें अरेस्ट किया फिर से बेल पर रिहा कर दिया और उस समय यह मामला वहां के लोअर कोर्ट में चल रहा था फिर लंदन के एक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने दिसंबर 2018 में अपना फैसला सुनाया कि भारत सरकार की तरफ से जो रिक्वेस्ट आई है वह सही है और विजय माल्या को भारत भेज दिया जाना चाहिए उनका प्रत्यर्पण हो सकता है ऐसा कुछ भी नहीं है कि उन्हें यहां पर रोका जाए।
लोअर कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ विजय माल्या ऊपरी अदालतों वहां की हाई कोर्ट अपील की और हाईकोर्ट में सुनवाई पिछले साल चली और फरवरी 2020 में भी काफी इसकी हेयरिंग हुई जिसके बाद फाइनली 20अप्रैल 2020 को फैसला सुनाया गया और इसमें उनकी अपील खारिज करते हुए कहा कि विजय माल्या भारत भेजा जा सकता है।
14 मई को यूके के हाईकोर्ट के दूसरी बेंच ने भी फैसला सुनाया और उन्होंने यह कहा कि जो लोअर कोर्ट का फैसला था और जो हाई कोर्ट की पहली बेंच का फैसला था वह पूरी तरह से सही है इस केस में ऐसा कुछ भी नहीं है कि यह यूके के सुप्रीम कोर्ट ने भेजा जाए तो यह अपील खारिज कर दी गई। विजय माल्या के पास यूके में अब कोई भी लीगल ऑप्शन नहीं बचा है।
2 साल पहले एक इंटरव्यू में विजय माल्या ने कहा था कि यूके की अदालतों में मेरा केस चलेगा तो मैं बहुत खुश हूं क्योंकि यहां की अदालत निष्पक्ष है तो बिल्कुल यूके की अदालत ने निष्पक्ष अपना जजमेंट देते हुए कहा कि इन्हें वापस भारत भेजा जाए।
यूके सरकार की भूमिका -
अदालत के फैसले के बाद यह मामला यूके के होम सेक्रेटरी के पास है। यूके की होम सेक्रेट्री भारतीय मूल की प्रीति पटेल है अब उनके विभाग के द्वारा 28 दिन के अंदर अंदर यह पूरा प्रोसेस खत्म करे और माल्या को वापस भारत भेज दे भारत सरकार को पूरी उम्मीद है कि 28 दिन में काम हो जाएगा क्योंकि भारत और यूके के संबंध काफी अच्छे हैं और दोनों सरकारों के बीच में बढ़िया तालमेल है तो यूके गवर्नमेंट इस प्रोसेस में रुकावट डालने की कोई कोशिश नहीं करेगी ऐसा पूरी उम्मीद है।
भारत और यूके के बीच में प्रत्यर्पण संधि 1992 में ही हो गया था लेकिन युक से भारत के गुनहगारों के प्रत्यर्पण इतना मुश्किल क्यों है भारत पिछले 18 सालों में 28 लोगों को प्रत्यर्पण करवाने के लिए युके की सरकार को रिक्वेस्ट भेज चुका है लेकिन अभी तक एक ही प्रत्यर्पण हुआ है अगर सब कुछ ठीक रहा तो विजय माल्या दूसरा व्यक्ति होगा।
विजय माल्या के बाद भारत सरकार का अगला टारगेट है भगोड़ा नंबर दो नीरव मोदी को वापस लेकर आना लेकिन नीरव मोदी का भी केस यूके के निचली अदालत में चल रहा है तू जैसा विजय माल्या की केस में हुआ वैसा ही कुछ यहां पर भी प्ले आउट होगा एक से डेढ़ साल में नीरव मोदी को भी भारत लाया जाये गए ऐसा उम्मीद किया जा सकता है।


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