लगभग 50 दिन के लकडॉउन के बाद दो बातें सामने आईं पहला की अगर लकडॉउन समय से नहीं लगा होता तो covid-19 के मरीजों की संख्या बहुत अधिक होती और दूसरी बार यह की ज्यादा दिन तक लकडॉउन करने से हमारी अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। बेरोजगारी बड़ सकती है , कंपनियां घाटे में चली जाएगी, शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिल सकता है इसी और भी बहुत सारी चुनौतियां देश के सामने खड़ी हो सकती है।
WHO हो या फिर कोई अन्य स्वास्थ्य संस्थान सबका मानना है कि करोना वायरस इतनी जल्दी हमारी जिंदगी से दूर नहीं जाएगा। करोना वायरस का प्रभाव बहुत दिनों तक देखा जा सकता है।
WHO हो या फिर कोई अन्य स्वास्थ्य संस्थान सबका मानना है कि करोना वायरस इतनी जल्दी हमारी जिंदगी से दूर नहीं जाएगा। करोना वायरस का प्रभाव बहुत दिनों तक देखा जा सकता है।
इन सब बातों को ध्यान में रखें भारत सरकार ने तीसरे लकडॉउन के खत्म होने के कुछ ही दिन पहले एक एडवाइजरी जारी किया जिसमें लिखा था " learning to live with Corona virus is going to become new normal." मतलब कि हमें करोना वायरस के साथ जीना सीखना होगा तभी सब कुछ सामान्य हो सकता है।
फिर कुछ दिन बाद WHO के बहुत से विशेषज्ञयों ने इस बात को दोहरा की हमें करोना वायरस के साथ जीना सीखना होगा।
WHO के इमरजेंसी एक्सपर्ट Mike Ryan ने कहा," Corona virus may become just another endemic virus in our community and the virus may never go away. HIV has not gone away, but we have to term with the virus. यानी कि हो सकता है कि करो ना वायरस कभी नहीं जाए और या एक स्थानिक वायरस की तरह हमारे समुदाय में रह जाए जैसे कि HIV वायरस हमारे समुदाय से नहीं गया लेकिन हम उसके साथ जीना सीख लिया वैसे ही करोना वायरस के साथ भी हमें जीना सीखना होगा।
विश्व स्तर पर किसी भी बीमारी को कंटेन करने के तीन चरण होते हैं 1- control, 2-elimination, 3- eradication
पहला चरण Control (नियंत्रित) वह अवस्था जहां नए संक्रमित मरीजों की संख्या ठीक होने वाले मजदूरों की संख्या से कम हो। मौजूदा समय में कोरोना वायरस नियंत्रित अवस्था में तो बिल्कुल भी नहीं है पूरे विश्व में गिने-चुने देशों को छोड़ कर बाकी देशों में आज भी नए मरीजों की संख्या ठीक हुए मरीजों से ज्यादा देखने को मिल रहे। चीन, जापान , दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड जैसे देशों का मानना था कि करोना वायरस पर कंट्रोल किया जा चुका है लेकिन फिर से चीन, जापान में कोरोना वायरस से नए मरीजों देखने को मिले थे।
दूसरा चरण Elimination (खत्म करना) इस प्रकार का भौगोलिक क्षेत्र जहां नए संक्रामक केस नहीं आ रहे हैं और सभी संक्रमित मरीजों का इलाज करके डिस्चार्ज कर दिया गया हो। कांगो में इस वर्ष के मार्च महीने में ही ebola के अंतिम मरीज को डिस्चार्ज करके ebola को eliminate किया गया है।
कोरोना वायरस के सापेक्ष में elimination की संभावना भी कम ही है क्यों की गोवा राज्य को ही उदाहरण के तौर पर देख ले 15 अप्रैल से 13 मई तक कोई नया केस नहीं आया फिर अचानक से नए केस आने लगे हैं। ऐसी तरह चीन के वुहान शहर में भी देखने को मिला यहां तक की जापान और दक्षिण कोरिया में भी बहुत दिनों के बाद नए केस दर्ज किए गए जिन्हें 2nd wave of Corona virus कहां गया। तो कहा जा सकता है कि कोरोना वायरस का elimination संभव नहीं है।
तीसरा चरण Eradication (उन्मूलन) अर्थात पूर्णतया समाप्त कर देना। आपको बता दें कि अभी तक पूरे विश्व से केवल small pox ही एक ऐसा मानवी रोग है जिसका उन्मूलन हो सका है 1980 में WHO द्वारा इसकी घोषणा की गई थी।
WHO की चेतावनी के अनुसार कोरोना वायरस का उन्मूलन संभव नहीं है। हो सकता है कि कोरोना वायरस भी अन्य वायरस जैसे की मलेलिया, टाइफाइड, इनफ्लुएंजा, HIV की तरह ही मानव जनसंख्या में रह जाए।
पोलियो को इंडिया से एलिमिनेट किया गया है और HIV/AIDS आज भी पूरे विश्व में कंट्रोल चरण में है।
हमें इस चुनौती को स्वीकार करना होगा और जिंदगी को फिर से सामान्य बनाने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना , मस्क लगा, हाथों को sanitize करना ये सब जीवन का हिस्सा बनना होगा। हमें अपने जीवन में मूलभूत परिवर्तन लाना होगा।
ऐसे बहुत से कदम सरकार द्वारा उठाए जा रहे हैं अब आवश्यकता है कि हम सभी अपनी जिम्मदारियों सुनिश्चित करें। Covid-19 एक संक्रामक विमारी हैं और इस पर जीत हासिल करने के लिए हम सभी को साथ मिलकर लड़ना होगा। जब तक कोरोना वायरस का कोई इलाज नहीं मिल जाता है तब तक हमें इसे हर जोर की लडाई मान कर सावधानी के साथ अपनी जिंदगी में आगे बठना होगा ।एक दिन भी हम दिन भी अगर ध्यान नहीं दिया गया तो हम फिर से खराब स्थिति में जाए गे। इसलिए सावधानी बहुत आवशयक है।
आशा करते हैं कि हमें Corona virus के साथ हमें जीना नहीं सीखना पड़ेगा और जल्द ही इस वायरस का कोई इलाज मिल जाएगा जिससे सभी लोगो की जिंदगी फिर से सामान्य हो जाएगी।
फिर कुछ दिन बाद WHO के बहुत से विशेषज्ञयों ने इस बात को दोहरा की हमें करोना वायरस के साथ जीना सीखना होगा।
WHO के इमरजेंसी एक्सपर्ट Mike Ryan ने कहा," Corona virus may become just another endemic virus in our community and the virus may never go away. HIV has not gone away, but we have to term with the virus. यानी कि हो सकता है कि करो ना वायरस कभी नहीं जाए और या एक स्थानिक वायरस की तरह हमारे समुदाय में रह जाए जैसे कि HIV वायरस हमारे समुदाय से नहीं गया लेकिन हम उसके साथ जीना सीख लिया वैसे ही करोना वायरस के साथ भी हमें जीना सीखना होगा।
Endemic Disease (स्थानिक रोग )
Endemic disease (स्थानिक रोग) उन्हें कहते हैं जहां एक वायरस या फिर कोई रोगाणु (pathogen) मानव जनसंख्या में ऐसे ही घूमता रहता है और टीकाकरण नहीं हुआ है तो संक्रमण होने की पूरी संभावना हो सकती है। हो सकता है कि वायरस या किसी पथोजन के कारण यह रोग किसी सीज़न विशेष में दिखे या फिर पूरे वर्ष देखने को मिले।विश्व स्तर पर किसी भी बीमारी को कंटेन करने के तीन चरण होते हैं 1- control, 2-elimination, 3- eradication
पहला चरण Control (नियंत्रित) वह अवस्था जहां नए संक्रमित मरीजों की संख्या ठीक होने वाले मजदूरों की संख्या से कम हो। मौजूदा समय में कोरोना वायरस नियंत्रित अवस्था में तो बिल्कुल भी नहीं है पूरे विश्व में गिने-चुने देशों को छोड़ कर बाकी देशों में आज भी नए मरीजों की संख्या ठीक हुए मरीजों से ज्यादा देखने को मिल रहे। चीन, जापान , दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड जैसे देशों का मानना था कि करोना वायरस पर कंट्रोल किया जा चुका है लेकिन फिर से चीन, जापान में कोरोना वायरस से नए मरीजों देखने को मिले थे।
दूसरा चरण Elimination (खत्म करना) इस प्रकार का भौगोलिक क्षेत्र जहां नए संक्रामक केस नहीं आ रहे हैं और सभी संक्रमित मरीजों का इलाज करके डिस्चार्ज कर दिया गया हो। कांगो में इस वर्ष के मार्च महीने में ही ebola के अंतिम मरीज को डिस्चार्ज करके ebola को eliminate किया गया है।
कोरोना वायरस के सापेक्ष में elimination की संभावना भी कम ही है क्यों की गोवा राज्य को ही उदाहरण के तौर पर देख ले 15 अप्रैल से 13 मई तक कोई नया केस नहीं आया फिर अचानक से नए केस आने लगे हैं। ऐसी तरह चीन के वुहान शहर में भी देखने को मिला यहां तक की जापान और दक्षिण कोरिया में भी बहुत दिनों के बाद नए केस दर्ज किए गए जिन्हें 2nd wave of Corona virus कहां गया। तो कहा जा सकता है कि कोरोना वायरस का elimination संभव नहीं है।
तीसरा चरण Eradication (उन्मूलन) अर्थात पूर्णतया समाप्त कर देना। आपको बता दें कि अभी तक पूरे विश्व से केवल small pox ही एक ऐसा मानवी रोग है जिसका उन्मूलन हो सका है 1980 में WHO द्वारा इसकी घोषणा की गई थी।
WHO की चेतावनी के अनुसार कोरोना वायरस का उन्मूलन संभव नहीं है। हो सकता है कि कोरोना वायरस भी अन्य वायरस जैसे की मलेलिया, टाइफाइड, इनफ्लुएंजा, HIV की तरह ही मानव जनसंख्या में रह जाए।
पोलियो को इंडिया से एलिमिनेट किया गया है और HIV/AIDS आज भी पूरे विश्व में कंट्रोल चरण में है।
कोरोना वायरस के साथ जीना सीखना के लिए किस तरह बदलाव लेने होंगे
हमारी सरकार को उम्मीद है कि जल्दी COVID-19 का कोई इलाज मिल जाएगा उन्हें अपने शोधकर्ताओं पर पूर्ण विश्वास है की जल्दी कोरोना वायरस कोई वैक्सीन मिल जाएगी लेकिन साथ ही साथ यह भी कहना है कि हमें करोना वायरस के साथ जीना सीखना होगा। इसीलिए लॉकडाउन के चौथे चरण में मरीजों की संख्या बढ़ने के बावजूद भी जिंदगी को फिर से सामान्य बनाने के लिए सरकार लॉकडाउन में शर्तों के साथ बहुत सी छूट प्रदान किए है। इसलिए आवश्यक है कि हमें कोरोना वायरस से बचाव के उपायों को जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बना ले। सरकार के निर्देशों का पूर्णतया पालन करें।हमें इस चुनौती को स्वीकार करना होगा और जिंदगी को फिर से सामान्य बनाने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना , मस्क लगा, हाथों को sanitize करना ये सब जीवन का हिस्सा बनना होगा। हमें अपने जीवन में मूलभूत परिवर्तन लाना होगा।
सरकार द्वारा भी बहुत से पहल शुरु किए गए हैं
- शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल क्लासेज पर जोर दिया जा रहा है डीटीएच के माध्यम से सभी कक्षाओं के छात्रों के लिए एक एक चैनल चलाने की बात की जा रही है जिससे किसी परिस्थिति में छात्रों की पढ़ाई ना रुके।
- डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा दिया जा रहा है जिससे की कम से कम लोग एक दूसरे के संपर्क में जाए और स्वम् को इस महामारी से सुरक्षित रखता है।
- Work from home की बात चल रही है जिसमें कम से कम लोग लोग ही ऑफिस आए । Stanford university के एक अध्ययन में पाया गया कि कर्मचारी 13.5% अधिक प्रभावशाली तरीके से घर पर रह कर काम करते है। इसलिए उम्मीद है कि हमारी इंडस्ट्री को भी इससे कुछ फायदा होगा।
- यातायात के क्षेत्र में जैसे की रेलवे स्टेशन , बस स्टैंड , एयरपोर्ट पर इन सभी जगहों पर thermal screening, social distancing जैसी आवश्यक चीजों का ध्यान दिया जा रहा है।
ऐसे बहुत से कदम सरकार द्वारा उठाए जा रहे हैं अब आवश्यकता है कि हम सभी अपनी जिम्मदारियों सुनिश्चित करें। Covid-19 एक संक्रामक विमारी हैं और इस पर जीत हासिल करने के लिए हम सभी को साथ मिलकर लड़ना होगा। जब तक कोरोना वायरस का कोई इलाज नहीं मिल जाता है तब तक हमें इसे हर जोर की लडाई मान कर सावधानी के साथ अपनी जिंदगी में आगे बठना होगा ।एक दिन भी हम दिन भी अगर ध्यान नहीं दिया गया तो हम फिर से खराब स्थिति में जाए गे। इसलिए सावधानी बहुत आवशयक है।
आशा करते हैं कि हमें Corona virus के साथ हमें जीना नहीं सीखना पड़ेगा और जल्द ही इस वायरस का कोई इलाज मिल जाएगा जिससे सभी लोगो की जिंदगी फिर से सामान्य हो जाएगी।

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