"Make in india" के तहत भारतीय रेलवे को मिला देश की पहली सबसे शक्तिशाली लोकोमोटिव इंजन "WAG 12B" जिसकी क्षमता 12000 Horsepower की है। इस इसका निर्माण बिहार के मधेपुरा में स्थित इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव फैक्ट्री में फ्रांस की बहुत बड़ी कंपनी Alstrom की सहायता से किया गया है और ट्रायल परीक्षण उत्तर प्रदेश के पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्टेशन पर सफलतापूर्वक पूर्ण किया गया है। भारतीय रेलवे के पास इससे पहले 10000HP से अधिक क्षमता की कोई इंजन नहीं थी। निश्चय ही यह भारतीय रेलवे बहुत बड़ी उपलब्धि है।
WAG 12B अपने ट्रायल परीक्षण में 118 बोगियों के साथ 6000 टन वजन लेकर, 100 km\hr के रफ़्तार चल कर अपनी क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया।
Alstrom SA फ्रांस की एक मल्टीनेशनल कंपनी है जिसका दुनिया भर में रेल परिवहन निर्माता कंपनी के रूप में बहुत नाम है। Alstrom कंपनी की रेल अपनी गुणवत्ता और डिजाइन के लिए पूरी दुनिया जनी जाती हैं। ये यूरोप, दक्षिणी अमेरिका, कनाडा और बहुत जगहों पर अपनी रेल का निर्यात करते हैं।
2015 में भारत सरकार ने अधिक क्षमता वाली लोकोमोटिव इंजन को बनाने के लिए Alstrom के साथ मिलकर मके इन इंडिया के तहत भारत में मधेपुरा स्थित इलेक्ट्रिकल लोकोमोटिव फैक्ट्री में इसके निर्माण के लिए एक समझौता किया। इस समझौता को 2015 में भारतीय रेलवे का सबसे बडा FDI प्रोजेक्ट बताया जा रहा है। 3.5 Billion euros के इस प्रोजेक्ट में 800 हाई पावर इंजन के निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई थी। इसमें से 795 भारत के मधेपुरा में बनाई जाएगी। इस समझौता में इंजन के मेंटिनेंस की सर्विस को भी शामिल किया गया था।
10 अप्रैल 2018 माननीय प्रानमंत्री मोदी जी के उद्घाटन के साथ इस प्रोजेक्ट पर कम शुरू हो पहली पांच लोकोमोटिव इंजन का आयात किया जाए गा फिर बाकी 795 लोकोमोटिव इंजन को भारत में ही बनाया जाएगा। 2020 के अंत तक भारतीय रेलवे को 35 हाई पावर इंजन मिल जाए गई इसके बाद 2021 में 60 और 2022 से 100 इंजन हर साल मिलती रहेगी। भारतीय रेलवे इन लोकोमोटिव इंजन का इस्तेमाल मलवाहनो में करेगी।
भारत के विकार में WAG12B का योगदान
भारत सरकार इस शक्तिशाली लोकोमोटिव इंजन का प्रयोग डेडीकेटेड फ्रेट कोरिडोर (DFC) में पर चले वाले मालवाहको में करने वाली है। जिससे आने वाले समय में एक स्थान से दूसरे स्थान पर समान में सुविधा बड़ जाएगी और समय के साथ साथ पैसे की बचत होगी।
भारत में दो डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बनाए जा रहे हैं। पूर्वी डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कोलकाता से पंजाब को जोड़ेगा और पश्चिमी डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर हरियाणा के रेवाड़ी से शुरू होकर मुंबई के जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह को जोड़ेगा।
भारत सरकार चाहती है कि आने वाले समय में बड़ी-बड़ी कंपनियों को इन डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के साथ कनेक्ट कर दिया जाए जिससे कंपनी में सामान उत्पादन के बाद से भारत के सभी जगहों पर उसे आसानी से सामानों को पहुंचाया जा सके। अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर होगा तो विदेशी कंपनियां भी भारत में निवेश करना चाहेंगी। जिससे रोजगार के साथ-साथ भारत में उत्पादन क्षमता भी बड़े गई जो भारत के विकार में एक महत्वपर्ण भूमिका निभाएंगी।
WAG 12B अपने ट्रायल परीक्षण में 118 बोगियों के साथ 6000 टन वजन लेकर, 100 km\hr के रफ़्तार चल कर अपनी क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया।
Alstrom SA फ्रांस की एक मल्टीनेशनल कंपनी है जिसका दुनिया भर में रेल परिवहन निर्माता कंपनी के रूप में बहुत नाम है। Alstrom कंपनी की रेल अपनी गुणवत्ता और डिजाइन के लिए पूरी दुनिया जनी जाती हैं। ये यूरोप, दक्षिणी अमेरिका, कनाडा और बहुत जगहों पर अपनी रेल का निर्यात करते हैं।
2015 में भारत सरकार ने अधिक क्षमता वाली लोकोमोटिव इंजन को बनाने के लिए Alstrom के साथ मिलकर मके इन इंडिया के तहत भारत में मधेपुरा स्थित इलेक्ट्रिकल लोकोमोटिव फैक्ट्री में इसके निर्माण के लिए एक समझौता किया। इस समझौता को 2015 में भारतीय रेलवे का सबसे बडा FDI प्रोजेक्ट बताया जा रहा है। 3.5 Billion euros के इस प्रोजेक्ट में 800 हाई पावर इंजन के निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई थी। इसमें से 795 भारत के मधेपुरा में बनाई जाएगी। इस समझौता में इंजन के मेंटिनेंस की सर्विस को भी शामिल किया गया था।
10 अप्रैल 2018 माननीय प्रानमंत्री मोदी जी के उद्घाटन के साथ इस प्रोजेक्ट पर कम शुरू हो पहली पांच लोकोमोटिव इंजन का आयात किया जाए गा फिर बाकी 795 लोकोमोटिव इंजन को भारत में ही बनाया जाएगा। 2020 के अंत तक भारतीय रेलवे को 35 हाई पावर इंजन मिल जाए गई इसके बाद 2021 में 60 और 2022 से 100 इंजन हर साल मिलती रहेगी। भारतीय रेलवे इन लोकोमोटिव इंजन का इस्तेमाल मलवाहनो में करेगी।
भारत के विकार में WAG12B का योगदान
भारत सरकार इस शक्तिशाली लोकोमोटिव इंजन का प्रयोग डेडीकेटेड फ्रेट कोरिडोर (DFC) में पर चले वाले मालवाहको में करने वाली है। जिससे आने वाले समय में एक स्थान से दूसरे स्थान पर समान में सुविधा बड़ जाएगी और समय के साथ साथ पैसे की बचत होगी।
भारत में दो डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बनाए जा रहे हैं। पूर्वी डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कोलकाता से पंजाब को जोड़ेगा और पश्चिमी डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर हरियाणा के रेवाड़ी से शुरू होकर मुंबई के जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह को जोड़ेगा।
भारत सरकार चाहती है कि आने वाले समय में बड़ी-बड़ी कंपनियों को इन डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के साथ कनेक्ट कर दिया जाए जिससे कंपनी में सामान उत्पादन के बाद से भारत के सभी जगहों पर उसे आसानी से सामानों को पहुंचाया जा सके। अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर होगा तो विदेशी कंपनियां भी भारत में निवेश करना चाहेंगी। जिससे रोजगार के साथ-साथ भारत में उत्पादन क्षमता भी बड़े गई जो भारत के विकार में एक महत्वपर्ण भूमिका निभाएंगी।


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