चीन के विधायिका ने हांगकांग पर एक अत्यधिक विवादित राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के प्रस्ताव को लागू करने की मंजरी दे दी है। ऐसा माना जा रहा है कि ये प्रस्ताव हांगकांग के बेसिक लॉ को पूर्णतया समाप्त कर देगी। इस प्रस्ताव से हांगकांग के लोगों को मिलने वाली राजनीतिक स्वतंत्रता और मौलिक अधिकार खत्म हो जाएगी।



नेशनल पीपुल्स काग्रेस (NCP) ने चाइना के संसद इस व्यापक सुरक्षा कानून को पेश किया। केवल एक प्रतिनिधि ने इसका विरोध किया और 2878 प्रतिनिधि ने समर्थन किया जिससे सर्वसम्मति से साथ इस प्रस्ताव पर गुरुवार 27 मई को मंजूरी दी गई। 

राष्ट्रीय सुरक्षा कानून में चीन को हांग कांग में धर्मनिरपेक्ष, राज्य शक्ति, आतंकवाद, विदेशी हस्तक्षेप को, प्रोटेस्ट आदि मामलों पर कानून बनाने का अधिकार मिल जाएगा और यह कानून मुख्य भूमि चीन की सुरक्षा एजेंसियों को भी हांगकांग  में संचालित करने की अनुमति प्रदान करेगा।

चीन द्वारा लाये गए  National anthem bill का विरोध हांगकांग में चल रहा था और उसी बिच अब यह राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई अब हांगकांग में विरोध और भी बढ़ गया है। बहुत से कॉलेज छात्र भी इस कानून के विरोध सड़को पे ,मॉल में प्रदर्शन कर रहे है।
  
विशेषज्ञों का कहना है कि चीन राष्ट्रीय सुरक्षा कानून की आड़ में हांगकांग की स्वायत्तता (Autonomy ) को समाप्त करना चाहता है।इस विवादित कानून का विरोध हांगकांग में ही नहीं बल्कि यूएस, यूके कनाडा ऑस्टेलिया और भी लोकतांत्रिक देश में हो रहा है। यूएस ने हांगकांग के इस विवादित राष्टीय सुरक्षा कानून के मुद्दे को UN security council में उठाना चाहा परंतु चाइना की आपत्ति के बाद इस पर कोई चर्चा नहीं हुआ।
 
UN में चीन के अंबेडकर Zhang Jun ने कहा कि यूएस के आधारहीन आवेदन को चीन खारिज करता है और यह कहा कि हांगकांग चीन का आन्तरिक मुद्दा है और इसका  UN security council से कुछ भी लेना देना नहीं है। एक ट्वीट के जरिए यह कहा कि यूएस को सत्ता की राजनीति बंद करनी चाहिए।और अंत में यह भी कह दिया कि यूएस पूरे विश्व में अशांति का कारण है।

हांगकांग इस प्रस्ताव का क्यों विरोध कर रहा है

हांगकांग 1997 से पहले एक ब्रिटिश कॉलोनी थी फिर ब्रिटेन ने हांगकांग की सत्ता को चीन को सौंप दिया था। उस समय हांगकांग का एक मिनी संविधान बना था जिसे बेसिक लॉ कहा जाता है। इस संविधान में हांगकांग के लोगों को मौलिक अधिकार, सामाजिक स्वतंत्रता दिया गया था। हांगकांग का अपना झंडा, अपना राष्ट्रगान है। इस संविधान में हांगकांग को अपने क्षेत्र में कानूनी अधिकार, राजनीतिक अधिकार और विदेश से व्यपार की स्वतंत्रता मिलता है।

हांगकांग "one country  two system" के साथ चीन से जुड़ा है। चीन ने 1997 में हांगकांग को आश्वासन दिया था कि 50 वर्षों तक यानि की 2047 तक चीन  इनके संविधान में कोई बदलाव नहीं करेगे। लेकिन चीन ने गुरुवार 27 मई को ही नए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को मंजूरी देकर हांगकांग के बेसिक लॉ को प्रभावहीन बनाने की कोशिश कर दी। हांगकांग के लोगो का मानना है कि ये प्रस्ताव से हांगकांग के बेसिक लॉ के विरुद्ध है और हांगकांग में लोगों को मिलने वाले मौलिक अधिकार खत्म कर देगा। इसीलिए हांगकांग के लोग इसका विरोध कर रहे हैं।

चीन ऐसा क्यों कर रहा है

 चीन बहुत दिनों से ऐसा चाहती है कि जो मुख्य भूमि चीन में जो कानून है वो हांगकांग में भी लागू हो लेकिन बेसिक लॉ में मिली स्वतंत्रता के कारण हांगकांग में प्रोटेस्ट होने लगते हैं। इन सब के देखते हुए चीन ने नया राष्ट्रीय सुरक्षा कानून हालाकि बेसिक लॉ के आर्टिकल 23 में स्थानीय सरकार को ऐसे कानून बनाने की अनुमति है और स्थानीय सरकार ने 2003 में राष्टीय सुरक्षा कानून लाया भी था लेकिन विरोध के कारण ये कभी प्रभावी नहीं हो सका।

अब चीन ने बेसिक लॉ के आर्टिकल 18 के annex ॥। का प्रयोग करके इस नया राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है जिसके साथ ही चीन को हांगकांग में बहुत से कानून लागू करने की अनुमति मिल जाएगी। मुख्य भूमि चीन की सरकार का विरोध करना, राष्टगान का विरोध ऐसा सब कुछ गैर कानूनी हो जाएगा। मतलब की चीन का हांगकांग शिकंजा और मजबूत हो जायेगा ।

2019 Protest

 
  • चीन ये चाहता है कि हांगकांग में हो रहे चाइना विरोधी आंदोलन खत्म हो जाए। चाहे 2014 का umbrella moment हो या फिर 2019 में "extradition law" (प्रत्यर्पण कानून) के विरोध में सबसे बड़ा प्रदर्शन हो। इस सबको खत्म करना चाहती है। चाइना मानता है कि विदेशी शक्तियों की वजह से हांगकांग में मुख्य भूमि चाइना के प्रति विरोध बड़ रहा है।
  • चीन मानता है कि हांगकांग की बेसिक लॉ में  उदार लोकतंत्र , बोलने की आजादी , स्वत्रंत न्यायपालिका   की वजह से ही मुख्य भूमि चीन में जो कानून है वो कानून हांगकांग में लागु नहीं पता है जिस वजह से हांगकांग में  चीन के सरकार के पॉलिसी का विरोध हो रहा है। इस लिए भी चीन हांगकांग के बेसिक लॉ के प्रभाव को खत्म करना चाहता है।
  • सबसे महत्वपूर्ण बात यह है की चाइना मानना है की अगर 2047 तक हांगकांग में लोकतंत्र रहा तो हांगकांग के बेसिक लॉ के खत्म होने के बाद भी चीन के सरकार का विरोध, चीन के कानून का विरोध और भी भयानक रूप में होगा जिसे नियंत्रित करना बहुत कठीन हो जाएगा। इसलिए चीन समय से पहले ही हांगकांग के ऑटोनॉमी को खत्म कर देना चाहता है।
विशेषज्ञ का यह भी कहना है की चीन ने यह निर्णय इस समय में इसलिए लिया है क्योंकि वह जानता था कि बहुत से देश कोरोना वायरस को लेकर परेशान है और हांगकांग में भी  लगभग एक साल से चल रहे प्रोटेस्ट कोरोना वायरस की वजह से बंद है ।जिसके कारण कोई इस प्रस्ताव का विरोध भी नहीं करेगा।

आने वाले समय में क्या उम्मीद किया जा सकता है

आने वाले समय में यूएस चाइना के बीच एक नया कोल्ड वार देखने को मिल सकता है। क्योंकि जिस तरह यूएस में ट्रप सरकार के अधिकारियों ने बयान आ रहे हैं उससे साफ लग रहा है कि यूएस की सरकार चाइना दण्डित करने के लिए व्यापार पर नया शुल्क लगाए गा और कुछ चाइनीज़ अधिकारियों पर भी प्रतिबंध लगा देगा। यूएस का मानना है की हांगकांग की स्वायत्तता तो अब नहीं रही इसलिए यूएस द्वारा हांगकांग को व्यापार में दिया जा रहा  विशेष अधिकार को भी यूएस खत्म कर सकता है। 

आने वाले दिनों में हांगकांग में प्रदर्शन और भी व्यापक रूप ले लेगा और चीन की सरकार, वहां की प्रशासन क्रूरता के साथ इस प्रदर्शन करियो को दबाने का प्रयास करेगी। जो मानवाधिकार के विरुद्ध रहेगा ।

हांगकांग में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू हो जाने के बाद जो अधिकार अभी हैं वह पूर्णतया समाप्त हो जाएंगे। ऐसा माना जा सकता है कि हांगकांग की स्वायत्तता समाप्त होने वाली है।

Post a Comment

Previous Post Next Post